परमात्मा की कृपा पाने के लिए तपस्या और अटूट श्रद्धा अनिवार्य है. स्वयं जगतजननी मां जगदंबा ने भी सती स्वरूप में भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन आराधना की थी. बिना साधना के ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है. उक्त बातें वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य सीताराम शरण ने तुमांग पंचायत के करकट्टा स्थित देवी मंडप परिसर में आयोजित नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के दौरान शुक्रवार को कही. आचार्य ने सती चरित्र और राजा दक्ष प्रजापति के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया. उन्होंने बताया कि विवाह के उपरांत माता सती ने लोक-कल्याण की भावना से प्रेरित होकर भगवान शिव से जीव के उद्धार का मार्ग पूछा था. महादेव ने उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि इस घोर कलयुग में जीव का कल्याण केवल ””””नवधा भक्ति”””” से ही संभव है. आचार्य ने विस्तार से बताया कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन ये भक्ति के नौ अंग हैं, जो मनुष्य इनमें से किसी भी एक मार्ग को सच्चे मन से अपना लेता है, उसे शिव की सन्निधि प्राप्त हो जाती है. कथा के समापन पर ब्रज की फूलोंवाली होली की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गयी. जैसे ही राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने पुष्प वर्षा शुरू की, श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर होकर झूम उठे और भजनों की धुन पर जमकर थिरके. कार्यक्रम का समापन महाआरती और महाप्रसाद वितरण कर किया गया.
27 खलारी 06 : व्यासपीठ से अतिथियों को सम्मानित करते आचार्य सीताराम शरण.
27 खलारी 07: शिव महापुराण कथा में ब्रज की फूलों वाली होली पर झूमते श्रद्धालु.
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