नो कैप पेपर आसान था.... लेट हिम कुक..., क्लॉक इट.... ब्रेनरॉट और ऑरा प्लस 1000...! यदि ये शब्द आपके कानों में पड़े और आप इनका मतलब न समझ पायें, तो घबराइए मत. यह आज की जेन-जी की नई दुनिया और उनकी अपनी भाषा है. मोबाइल स्क्रीन के चैट बॉक्स से निकलकर यह स्लैंग अब कॉलेज कैंपस, कोचिंग इंस्टीट्यूट, दोस्तों की गपशप और यहां तक कि संसद भवन तक गूंज रही है.
जेन-जी के बातचीत में सिर्फ नये शब्द ही नहीं, बल्कि इमोजी, हाथों के इशारे और चेहरे के एक्सप्रेशन भी बहुत जरूरी हैं. जेन-जी कम शब्दों में ज्यादा एक्स्प्रेस करना पसंद करते हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह ट्रेंडी स्लैंग अब आम बातचीत में भी सुनाई देने लगे हैं. किसी दोस्त ने शानदार काम किया तो 'एट दैट' कह दिया. यदि किसी का आत्मविश्वास या स्टाइल प्रभावित करें तो 'ऑरा प्लस 1000' कहकर उसकी तारीफ कर दी जाती है. वहीं, किसी की गलती या झूठ पकड़ लेने पर 'क्लॉक इट' बोल दिया जाता है. जेन-जी के अनुसार दोस्तों के बीच मस्ती के माहौल में बातचीत का यह नया तरीका है. साथ ही नये स्लैंग के इस्तेमाल से कम शब्दों में पूरी बात कह दी जाती है.
सिर्फ इमोजी नहीं, हाथों के इशारे भी बोलते हैं
जेन-जी चैट बॉक्स के इमोजी को अब असल जिंदगी के संवाद में भी इस्तेमाल कर रहे हैं. दोस्तों से मिलते समय उंगलियों से मिनी हार्ट बनाकर अपनापन जताना, उंगलियों से माइक्रो क्लैप कर प्रशंसा करना और मुट्ठी टकराकर बधाई देना आम हो गया है. दोनों हाथों की उंगलियों को मिलाकर शर्मीला अंदाज भी जताया जाता है. युवा बिना कुछ बोले सिर्फ हाथों के इशारों से ही पूरी बात समझा दे रहे हैं.
सोशल मीडिया से निकलकर बोलचाल की भाषा तक
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड होने वाले शब्द कुछ ही दिनों में युवाओं की रोजमर्रा की भाषा का हिस्सा बन रहे हैं. इसके अलावा वायरल मीम्स को भी बोलचाल की भाषा में शामिल किया जा रहा है. हाल के दिनों में कई वायरल साउंड इफेक्ट, जैसे 'फाहह', का भी युवा बातचीत में इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा गेमिंग में इस्तेमाल होने वाले कई शब्द भी अब आम बोलचाल का हिस्सा बन चुके हैं.
कहां से आया यह ट्रेंड ?
जेन-जी की यह नयी भाषा, स्लैग्स और साइन लैंग्वेज अचानक या किसी एक जगह से शुरू नहीं हुई, बल्कि यह इंटरनेट संस्कृति, सोशल मीडिया और गेमिंग कल्चर का मिला-जुला परिणाम है. इंस्टा रील्स इस नयी भाषा का सबसे बड़ा 'कारखाना' बनकर उभरा है. वर्ष 2018-19 के बाद जब शॉर्ट वीडियो का दौर शुरू हुआ, तब 15 से 30 सेकेंड के वीडियो में अपनी बात तेजी से और प्रभावी ढंग से कहने के लिए नये शब्द और इशारे प्रचलन में आये.
