Ranchi News : एजी, ओजी...पीजी बनी युवाओं की भाषा

गेमिंग से निकलकर जनरेशन जेड और अल्फा की रोजमर्रा की भाषा में रच-बस गया है.

नया स्लैंग ट्रेंड. आजकल गेमिंग की दुनिया से निकले शब्द बनते जा रहे युवाओं के बोलचाल का हिस्सा

रांची(क्रांति दीप). “भाई तू तो ओपी है…” आजकल यह वाक्य युवाओं की बातचीत में आम सुनने को मिलता है. यहां ओपी का अर्थ है ओवर पावर्ड, यानी जब कोई इंसान, चीज या प्रदर्शन अत्यधिक प्रभावशाली लगे. यह शब्द अब एक तारीफ बन चुका है. गेमिंग से निकलकर जनरेशन जेड और अल्फा की रोजमर्रा की भाषा में रच-बस गया है. इसी तरह “तू आज एजी हो गया है” का अर्थ होता है तू आज आक्रामक मूड में है. “पीजी” यानी पावर गेनर या प्रो गेमर, किसी खिलाड़ी के प्रोफेशनल गेमप्ले की सराहना के लिए बोला जाने वाला नया शब्द है. यह सिर्फ तीन उदाहरण हैं, ऐसे ही ढेरों गेमिंग और डिजिटल स्लैंग्स आज की युवा भाषा में प्रवेश कर चुके हैं. आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और गेमिंग से निकले शब्द और स्लैंग को बातचीत का हिस्सा बना रहे हैं. इसमें ओपी, एनसीपी, जीजी, डब्ल्यू, एल, नो कैप, टी जैसे शब्द अब चैट और बातचीत में आम हो गये हैं. इसके साथ ही इंग्लिश के कई शब्दों के शॉर्ट फॉर्म का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है. मोबाइल और इंटरनेट के दौर में नयी पीढ़ी अपने चैट में नये-नये शब्दाें का इस्तमाल करते हैं. इस भाषा में शब्द कम, एक्सप्रेशन ज्यादा होते हैं.

जेनरेशन के साथ बदलते रहे हैं स्लैंग्स

बदलते समय के साथ हर जेनरेशन की अपनी भाषा होती है. जिससे वे बातचीत करते हैं, खुद को व्यक्त करते हैं. बदलते जेनरेशन के साथ बोलचाल और मैसेज करने की भाषा में भी बदलाव होते रहे हैं. इंटरनेट और गेमिंग की दुनिया ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है. सोशल मीडिया और चैटिंग ऐप्स पर इन स्लैंग्स का चलन तेजी से बढ़ा है. स्लैंग्स में भावनाएं होती हैं. यह कम शब्दों में ज्यादा बात कहने का तरीका है.

स्लैंग्स के सकारात्मक प्रभाव

::: कम शब्दों में ज्यादा अभिव्यक्ति : स्लैंग्स की खासियत है कि ये कम शब्दों में अपनी बात और भावना को प्रस्तुत किया जा सकता है. युवा इसे तेजी से अपनाते हैं क्योंकि ये ट्रेंडी और डायनामिक होते हैं.

::: आपसी जुड़ाव और सामुदायिक भावना : एक जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले युवाओं में एक खास तरह की बॉन्डिंग बनती है.

::: क्रिएटिविटी और नयी सोच को बढ़ावा : नयी स्लैंग्स युवा पीढ़ी की रचनात्मकता का उदाहरण है. ये समाज, रिश्तों को नये नजरिए से देखने का तरीका भी पेश करते हैं.

::: डिजिटल भाषा के साथ सामंजस्य : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से संवाद करने के लिए स्लैंग्स बहुत उपयोगी है.

नकारात्मक पहलू भी कम नहीं

::: भाषा की शुद्धता पर खतरा : लगातार स्लैंग्स के इस्तेमाल से भाषा और व्याकरण खराब हो सकता है.

::: बड़ों से संवाद में दूरी : जिन शब्दों का मतलब बड़े या बुजुर्ग नहीं समझते, उनके साथ संवाद में दूरी बढ़ती है. इससे पीढ़ियों के बीच गैप और गहरा हो सकता है.

::: कुछ स्लैंग का इस्तेमाल किसी व्यक्ति का मजाक उड़ाने के लिए किया जाता है, जिससे साइबरबुलिंग और मानसिक तनाव की स्थिति भी बन सकती है.

जानिए… ऐसे ही कुछ चर्चित स्लैंग्स के मतलब

:::: ओपी-ओवर पावर्ड : जब कोई चीज या इंसान बहुत ज्यादा अच्छा लगे. गेमिंग में कोई चीज या किरदार जो गेमप्ले में ज्यादा ताकतवर हो.

:::: एनपीसी : नॉन प्लेयर कैरेक्टर : ऐसा व्यक्ति जिसमें कोई खास व्यक्तित्व नहीं होता है.

:::: जीजी : गुड गेम : अच्छा खेला या अच्छी कोशिश रही.

::: डब्ल्यू या एल : कुछ शानदार या जीत हुई तो डब्ल्यू, असफलता हुई तो एल.

::: नो कैप : जब कोई बात बिलकुल सच हो, तो युवा कहते हैं, नो कैप ब्रो, यानी बिना झूठ के.::: एएफके : अवे फ्रॉम कीबोर्ड : ध्यान नहीं देने या मौजूद नहीं रहने पर, गेमिंग में खेल से दूर हो जाने के लिए.

::: ट्राई हार्ड : किसी आसान चीज में ज्यादा मेहनत करते हैं.

::: कल्च : आखिरी समय में या मुश्किल हालात में मदद करना.

::: रेजक्वीट : गुस्से या चिढ़ में अचानक खेल छोड़ देना.

::: ग्राइंड : लगातार मेहनत करना, गेमिंग में बार-बार एक ही काम करना ताकि लेवल या स्किल बढ़े.

::: टी : किसी प्रकार के गोसिप के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

::: लीट : जब कोई चीज बहुत मजेदार या शानदार हो.

::: स्ले : बहुत अच्छा दिखना या कुछ अच्छा करना.

::: जीओएटी : ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम.

:::: फ्लेक्स : किसी चीज का दिखावा करना.

::: वाइब : माहौल या फीलिंग.

::: घेस्टिंग : बिना बताये किसी से बात बंद कर देना.

::: सस : स्पेसियस, संदिग्ध या शक करने लायक.

::: सेवेज : जो बहुत बिंदास और बेधड़क हो.

::: लॉकी : कुछ बात चुपचाप या सीक्रेट रखना

::: ओजी : ओरिजिनल गैंगस्टर : आमतौर पर किसी ऐसे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो किसी क्षेत्र में अनुभवी, विश्वसनीय, या पुराने स्कूल का हो.

::: एजी : अग्रेसिव : यानी आक्रामक व्यवहार के छोटे रूप के तौर पर उपयोग में आता है.

::: डेलूलू-डेल्यूजन : कुछ ऐसा सोचना जो असलियत से दूर हो.

::: रीज्ज : आकर्षण या दिल जीतने की कला.

::: ग्रीन फ्लैग, रेड फ्लैग : सकारात्मक संकेत और नकारात्मक संकेत के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

कवर स्टोरी में जोड़……

परीक्षा में कट सकते हैं नंबर

नयी जनरेशन में नये स्लैंग्स का इस्तेमाल देखा जाता है. यह बातचीत की एक भाषा है, जो समय के साथ बदलती रहती है. ऐकेडमक्स में भी कई बार स्टूडेंट्स शॉर्ट में लिख देते हैं. इससे बचना चाहिए. इससे लिखने की भाषा खराब हो सकती है, परीक्षा में अंक कट सकते हैं. ऐकेडमक्स में ऐसे शब्दाें के इस्तेमाल से बचना चाहिए. इस भाषा शैली का इस्तेमाल कहां करना है, इसका भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है.

प्रणव कुमार, शिक्षक, जेवीएम श्यामली

नयी जनरेशन में संवाद का एक तरीका है. अपनी सहुलियत के हिसाब से शब्दों का प्रयोग करते हैं. यह दोस्तों के बीच मजाक मस्ती भरा लैंग्वेज है. लेकिन, सभी लोगों के साथ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

इशिका पात्रा, छात्रा, रांची

…………………स्लैंग्स का इस्तेमाल हमेशा से होता रहा है. छोटे शब्दों का इस्तेमाल, खास फ्रेज का इस्तेमाल, किसी खास अवसर के लिए किया जाता है. यह दोस्तों के बीच बातचीत करने का अंदाज होता है. लेकिन, प्रोफेशनल बातचीत में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए.

श्रेया जेन एक्का, छात्रा

…………………………..नये जनरेशन में बोलचाल की भाषा में गेमिंग की दुनिया में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का काफी इस्तेमाल होता है. मैसेज या सोशल मीडिया में यह चलन बढ़ा है. लेकिन, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कहां और किसके सामने करना चाहिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

युवराज श्रीवास्तव, विद्यार्थी

……………………………………….यह एक फैन लैंग्वेज है, जिसमें नयी पीढ़ी एक-दूसरे से संवाद करती है. गेम खेलते हैं तो बातचीत में गेमिंग टर्म का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में एक अपनापन सा महसूस होता है. आजकल दोस्तों के बीच होने वाली बातचीत में गेमिंग से जुड़ी शब्दों का खूब इस्तेमाल होता है.

हर्षित सागर, विद्यार्थी

……………………………यह जो शब्द नये स्लैंग्स के रूप में इस्तेमाल होते हैं. यह नया नहीं है, यह समय के साथ बदलता रहा है. सहुलियत के अनुसार युवा शब्दों को छोटा कर देते हैं. प्रोफेशनल काम के लिए ऐसे शब्दाें के चयन से बचना चाहिए.

प्रियांशु कुमार, विद्यार्थीB

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