Ranchi: महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की एनडीए सरकार पर पलटवार किया है. राज्य की ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा लाये गये महिला आरक्षण व परिसीमन बिल पर सवाल खड़े किये हैं. कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर केंद्र सरकार ने पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखने की कोशिश की है. केंद्र सरकार की नियत सही नहीं है. महिला आरक्षण के नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र की एनडीए सरकार राजनीति कर रही है.
केंद्र की मंशा पर सवाल
दीपिका पांडेय ने आगे कहा कि इनकी मंशा महिलाओं को अधिकार देने की नहीं है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, तब उम्मीद थी कि जनगणना के बाद ओबीसी वर्ग को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा. इसी विश्वास के साथ विपक्ष ने सर्वसम्मति से इस विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन तीन साल तक इसे लागू न करना और अब बिना जनगणना के परिसीमन लागू करने की कोशिश करना, संविधान और संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है.
33 प्रतिशत आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग
मंत्री श्रीमती पांडेय ने कहा कि देश की जनता अब केंद्र सरकार की मंशा समझ चुकी है. महिलाओं, किसानों और मजदूरों से किये गये वादे अधूरे हैं. सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रति संवेदनशील होती, तो उन्नाव, हाथरस, कठुआ और मणिपुर जैसे मामलों में चुप्पी साधे बैठे नहीं रहती. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाना भ्रामक और दुर्भाग्यपूर्ण है. 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने में विपक्ष ने पूरा सहयोग दिया था. इसके बावजूद इसे लागू करने में देरी और 16 अप्रैल 2026 को देर रात अधिसूचना जारी करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है.
मंत्री ने कहा कि लोकसभा, राज्यसभा और सभी विधानसभाओं में तत्काल प्रभाव से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को वास्तविक और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिल सके.
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