खलारी. खेल के प्रति जुनून हो तो खेत भी स्टेडियम नजर आने लगते हैं, लेकिन सुविधाओं का अभाव ग्रामीण प्रतिभाओं के मनोबल को तोड़ रहा है. आज जहां सरकार खेलो झारखंड जैसे अभियानों के जरिए खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का दावा कर रही है, वहीं चुरी होयर गांव के कुछ टोला की जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर नजर आती है. संसाधनों की कमी और प्रशासन की उदासीनता के कारण यहां के उभरते खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जिससे उनकी खेल क्षमता गांव की पगडंडियों तक ही सिमट कर रह गयी है. अगर समय रहते इन बच्चों को सही मंच और संसाधन नहीं मिले, तो भविष्य के कई बेहतरीन खिलाड़ी मैदान के अभाव में गुमनामी के अंधेरे में खो जाएंगे. इसी के तहत खलारी प्रखंड के चुरी दक्षिणी पंचायत अंतर्गत चुरी होयर गांव और उसके अंतर्गत अंबा डोंगरी, सामु टोंगरी, पियार टांड, और करंज तोरा टोला के बच्चों की स्थिति काफी दयनीय है, जो पर्याप्त खेल मैदान न होने के कारण गांव के खेतों को ही अपना रणक्षेत्र मानने पर मजबूर हैं.
खेतों को समतल कर खुद बनाया मैदान
होयर गांव के बच्चे अमन कुमार, रौशन कुमार, रोहित कुमार, बिक्की कुमार, हिमांशु कुमार, अमर कुमार, चंदन कुमार, अभिषेक कुमार, चंदन कुमार, अंकित कुमार, आदित्य कुमार और दिलीप ने बताया कि गांव में मैदान नहीं होने के कारण वे खेतों में ही क्रिकेट, फुटबॉल और बॉलीवाल खेलते हैं. उन्होंने खुद मेहनत कर खेत को खेलने लायक बनाया है. बच्चों ने दर्द साझा करते हुए कहा कि जब बारिश होती है, तो खेतों में पानी भर जाता है और हमारा खेलना बंद हो जाता है. आर्थिक तंगी के कारण हम खेल सामग्री भी नहीं खरीद पाते.
