रांची (SIR) .राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने निर्वाचन सदन में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रगति की समीक्षा की. बैठक में उन्होंने कहा कि SIR का मुख्य उद्देश्य शुद्ध, त्रुटिरहित और समावेशी मतदाता सूची तैयार करना है. इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
निर्वाचन आयोग के निर्देशों का करे पालन
उन्होंने निर्वाचन सदन में रांची जिले में SIR की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया. श्री रविकुमार ने निर्देश दिया कि एक परिवार या घर के सभी मतदाताओं का नाम एक ही मतदान केंद्र की सूची में दर्ज हो. इसके लिए इआरओ को नजरी नक्शे का सही तरीके से सत्यापन करने को कहा गया. गृह संख्या और नोशनल नंबर की भी सावधानीपूर्वक जांच करने को कहा.
प्रत्येक दस्तावेजों का नियमानुसार गहन जांच
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि बीएलओ द्वारा किये गये कार्यों के सही निष्पादन की जिम्मेदारी बीएलओ सुपरवाइजर की होगी. सुपरवाइजर की ओर से लापरवाही मिलने पर इआरओ कार्रवाई करते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी को सूचना देंगे. श्री रविकुमार ने प्रत्येक आवेदन, दावा-आपत्ति, नोटिस और उपलब्ध कराये गये दस्तावेजों की नियमानुसार गहन जांच का निर्देश दिया.
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लंबित मामलों का तय समय-सीमा में निष्पादन
उन्होंने कहा कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं छूटना चाहिए और किसी विदेशी नागरिक का नाम सूची में शामिल नहीं होना चाहिए. इआरओ और एइआरओ को क्षेत्रीय स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी और लंबित मामलों का तय समय-सीमा में निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.
नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950
जानकारी या सहायता के लिए नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क कर सकते हैं. बैठक में जिला निर्वाचन पदाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे.
नोटिस मिलने पर दस्तावेज देने के लिए मिलेंगे 14 दिन
झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत 24 अगस्त से नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य श्रेणियों में शामिल मतदाताओं के मामलों की सुनवाई शुरू होगी. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने और दावा-आपत्तियों की प्रक्रिया का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता को सूची से बाहर करना नहीं, बल्कि सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है.
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पहले सात दिन, फिर सात दिन का मौका
नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य संबंधित सूचियों में शामिल मतदाताओं को इआरओ स्तर से नोटिस दिया जायेगा. नोटिस मिलने के बाद दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पहले चरण में सात दिन का समय मिलेगा. इस अवधि में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर बीएलओ दोबारा संपर्क करेंगे और फिर से नोटिस देंगे. इसके बाद दस्तावेज जमा करने के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा.
दावा-आपत्ति करने की अवधि 5 अगस्त से 15 सितंबर
दावा-आपत्ति दाखिल करने की अवधि पांच अगस्त से 15 सितंबर तक है. प्राप्त दावे-आपत्तियों का निष्पादन संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा 14 अक्तूबर 2026 तक किया जायेगा. नाम जोड़ने और सुधार का भी चल रहा काम वर्तमान में राज्य में दावे-आपत्तियां प्राप्त करने के साथ नये पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और सूची में दर्ज प्रविष्टियों में धार का काम जारी है.
अंतिम सूची में शामिल होंगे योग्य मतदाता
जिनका नाम किसी दूसरे राज्य की सूची में दर्ज है और वे झारखंड की सूची में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उनसे फॉर्म-8 और घोषणा पत्र प्राप्त कर नाम दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. एक परिवार को एक ही मतदान केंद्र की सूची में दर्ज करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. और आंकड़ों में पायी गयी त्रुटियों और विसंगतियों को दूर किया जा रहा है. नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया के माध्यम से दस्तावेजों तथा उपलब्ध आंकड़ों का विधिसम्मत सत्यापन होगा. इन्यूमरेशन चरण में मतदाताओं से प्राप्त आवेदनों बाद योग्य मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल किया जायेगा.
विदेशी नागरिक के नाम पर दर्ज करें आपत्ति
के रविकुमार ने संविधान के अनुच्छेद326 का हवाला देते हुए कहा कि केवल भारत के नागरिक ही मतदाता सूची में पंजीकृत हो सकते हैं. उन्होंने राजनीतिक दलों, बीएलए-2 और आम नागरिकों से अपील की कि यदि किसी विदेशी नागरिक का नाम सूची में शामिल है या शामिल होने का प्रयास किया जा रहा है, तो फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज करायी जाये.
