Chaiti Chhath Puja, रांची (राजकुमार लाल की रिपोेर्ट): झारखंड में चैती छठ महापर्व के दूसरे दिन सोमवार को खरना का अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. व्रत रखने वाले लोगों ने दिन भर कुछ नहीं खाया, फिर शाम को पूजा की और भगवान सूर्य को भोग चढ़ाया. इसके बाद खीर, रोटी और अन्य प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू किया गया.
खरना पर प्रसाद और पूजा का विशेष महत्व
व्रतियों ने दोपहर बाद से ही खीर-रोटी सहित विभिन्न तरह के प्रसाद तैयार करना शुरू कर दिया था. सूर्यास्त के बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गयी. पूजा के बाद प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे ग्रहण करने के साथ ही कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत हो गयी.
आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ
महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ अर्पित किया जाएगा. व्रती सुबह स्नान-ध्यान के बाद प्रसाद तैयार करेंगी और दोपहर बाद अर्घ की टोकरी व सूप सजायेंगी. लोकगीतों के मधुर स्वर के बीच शाम करीब चार बजे छठ घाट के लिए प्रस्थान करेंगी, जहां डूबते सूर्य को अर्घ दिया जायेगा.
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घाटों से लेकर घरों तक तैयारी
अर्घ देने के लिए श्रद्धालु नदी, तालाब और डैम जैसे जल स्रोतों की ओर रुख करेंगे. वहीं कई लोग अपने घरों के पास बनाये गये कृत्रिम तालाबों या बड़े टब में भी अर्घ देने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे हर कोई इस महापर्व में शामिल हो सके.
उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ के साथ होगा समापन
बुधवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ देने के बाद पूजा-अर्चना और हवन किया जायेगा. इसके साथ ही प्रसाद वितरण कर चैती छठ महापर्व का समापन होगा,
विशेष फल के लिए मंत्रोच्चार का महत्व
पंडित दिलीप कुमार मिश्रा के अनुसार, भगवान सूर्य को उनके बारह नामों से अर्घ देने और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
लोकगीतों से गूंजा माहौल
छठ महापर्व के दौरान पारंपरिक लोकगीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया है. लोग “पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार…” और “ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से…” जैसे गीतों के साथ श्रद्धालु छठी मईया और भगवान सूर्य की आराधना में लीन हैं. पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठा है.
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