Ranchi news : आत्महत्या की रिपोर्टिंग में सतर्कता जरूरी : विशेषज्ञ

रिनपास में आत्महत्या रिपोर्टिंग पर मीडिया सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम

रिनपास में आत्महत्या रिपोर्टिंग पर मीडिया सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम रांची. रिनपास में विश्व आत्महत्या निरोधक दिवस के अवसर पर आत्महत्या रिपोर्टिंग के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता को लेकर सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत है. आत्महत्या रिपोर्टिंग को बहुत अधिक प्राथमिकता देने से बचना चाहिए. आत्महत्या करने से परिवार की परेशानी बढ़ जाती है. परिजनों को लगता है कि समाज उनको अच्छे नजर नहीं देख रहा है . परिवार वालों पर भी दबाव होता है. झारखंड के अखबारों में देखें, तो हर दिन एक ना एक आत्महत्या की खबरें जरूर छपती है. आत्महत्या की इच्छा एक मानसिक परेशानी है. इसके लिये जो हेल्प लाइन है, उसे भी मीडिया में जगह मिलनी चाहिए. पूर्व निदेशक डॉ जयति सिमलई ने कहा कि बच्चों को शुरुआती दिनों से ही मानसिक रूप से मजबूत करना चाहिए. उनको शुरू से ही आने वाली चुनौतियों से लड़ने सिखाना चाहिए. इससे बच्चे आगे चलकर सही और गलत निर्णय ले पायेंगे. लेकिन, आजकल परिवार के लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं. संस्थान के मनोचिकित्सक डॉ सिद्धार्थ सिन्हा ने कहा कि आज लोगों में सामाजिक दूरियां बढ़ती जा रही है. परिवार में भी लोग एक साथ नहीं बैठते हैं. दोस्त नहीं रहें. काम करने वाले संस्थानों में भी दूरियां बन रही है, यह ठीक नहीं है. इससे आत्महत्या करने की इच्छा रखने वालों को साथी नहीं मिल पाता है. रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेंद्र सोरेन ने कहा कि आत्महत्या किसी परेशानी का समाधान नहीं है. समाधान जिंदा रहने से ही निकल सकता है. अच्छा और बुरा सबके लिये होता है. इस परेशानी से लड़ने की जरूरत है. इस मौके पर उप निदेशक सीमा सिंह, अधीक्षक डॉ विनोद कुमार महतो, डॉ सुभाष सोरेन, डॉ मनीषा किरण, डॉ मशरुर जहां सहित अन्य मौजूद थे.

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Published by: Deepesh kumar

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