भाजपा नेता प्रकाश सिंह के खिलाफ प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही निरस्त, नहीं मिला पर्याप्त सबूत

झारखंड हाईकोर्ट ने भाजपा नेता प्रकाश कुमार सिंह को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दिया है। यह फैसला धाराओं में अपराध के आवश्यक तत्वों की कमी पाए जाने के आधार पर लिया गया है।


Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने भाजपा नेता प्रकाश कुमार सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने प्रकाश कुमार सिंह की ओर से दायर क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. मामला बेरमो थाना कांड संख्या 60/2024 से जुड़ा था. अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाया कि प्रार्थी के खिलाफ लगायी गयी धाराओं के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते हैं. इसी आधार पर अदालत ने प्राथमिकी समेत मामले में अब तक चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया.

तीन धाराओं में नहीं बनता अपराध

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रकाश कुमार सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 171-एफ और 171-एच के तहत अपराध नहीं बनता है. अदालत के अनुसार, प्रार्थी के खिलाफ इन धाराओं में अपराध के लिए जरूरी कानूनी तत्व रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं हैं. अदालत ने यह भी माना कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रार्थी के खिलाफ आरोप तय करने का पर्याप्त आधार नहीं था. ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं था.

डिस्चार्ज याचिका खारिज करने पर भी टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के 17 दिसंबर 2025 के आदेश पर भी विचार किया. उस आदेश के माध्यम से प्रकाश कुमार सिंह की ओर से दायर डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया गया था. हाइकोर्ट ने कहा कि डिस्चार्ज याचिका को खारिज करना विधिसम्मत नहीं था. अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का परीक्षण करने के बाद कहा कि प्रार्थी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं थी. इस टिप्पणी के बाद निचली अदालत की कार्यवाही पर भी सवाल खड़ा हुआ और हाइकोर्ट ने प्राथमिकी से लेकर उसके आधार पर चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को ही समाप्त कर दिया. यानी जिस मामले ने न्यायिक गलियारों में लंबी यात्रा की, अंततः अदालत ने उसकी बुनियाद में ही आवश्यक कानूनी तत्वों की कमी पायी.

क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका से मिली राहत

प्रकाश कुमार सिंह ने झारखंड हाइकोर्ट में क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका दाखिल कर तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के 17 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी थी. उन्होंने निचली अदालत द्वारा उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज किये जाने के फैसले को निरस्त करने की मांग की थी. हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार ठाकुर, अधिवक्ता राजेश कुमार और अधिवक्ता अनीश कुमार सिन्हा ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत के समक्ष प्रार्थी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने के पक्ष में दलीलें पेश कीं.

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बेरमो थाना कांड से जुड़ा था मामला

यह पूरा मामला बेरमो थाना कांड संख्या 60/2024 के तहत दर्ज प्राथमिकी से संबंधित था. प्राथमिकी के आधार पर प्रकाश कुमार सिंह के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी. बाद में उन्होंने निचली अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल की, जिसे 17 दिसंबर 2025 को तेनुघाट व्यवहार न्यायालय ने खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने हाइकोर्ट का रुख किया. हाइकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोपों के लिए जरूरी कानूनी आधार पर्याप्त नहीं है. अदालत ने इसी आधार पर प्राथमिकी और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया. इस आदेश के साथ भाजपा नेता प्रकाश कुमार सिंह को मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. कोर्ट का फैसला इस बात पर केंद्रित रहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत अपराध के आवश्यक तत्व और आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद नहीं थी.

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By Rana pratap

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