Political news : जिन्होंने नेतृत्व किया, सरकार उन्हें भी आंदोलनकारी नहीं मानती : बेसरा

आजसू का 40वां स्थापना दिवस मना, कई प्रस्ताव पारित. आजसू का राज्य स्तरीय सम्मेलन इसी वर्ष अक्तूबर या नवंबर में होगा.

रांची. ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) का 40वां स्थापना दिवस रविवार को मोरहाबादी स्थित डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान में मनाया गया. आजसू के संस्थापक महासचिव रहे सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन के समय कई युवाओं ने अपनी डिग्रियां फाड़ दी. उन्होंने नौकरी नहीं की. कई लोगों ने शादी नहीं की. पर राज्य गठन के बाद आजसू के नाम पर बनी पार्टी के लोग सत्ता भोगते रहे. राज्य किसने बनाया और राज कौन कर रहा है? दुर्भाग्य है कि जिन्होंने नेतृत्व किया, सरकार उन्हें भी आंदोलनकारी नहीं मानती. जबकि आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग में फर्जी तरीके से आंदोलनकारी बनाने का खेल जारी है. कार्यक्रम के दौरान कई प्रस्ताव पारित किये गये. प्रस्ताव में कहा गया है कि आजसू का राज्य स्तरीय सम्मेलन इसी वर्ष अक्तूबर या नवंबर में होगा. इसके अलावा राज्य के पुनर्गठन में आजसू की भूमिका व नयी पीढ़ी को तैयार करने पर भी विचार किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ त्रिवेणी नाथ साहू थे. इस

राज्य गठन में आजसू का बड़ा योगदान

संस्थापक अध्यक्ष रहे प्रभाकर तिर्की ने कहा कि लंबे समय से सत्ता पर रहने से लोग निरंकुश हो जाते हैं. उन्हें याद दिलाना जरूरी है कि झारखंड कैसे बना. राज्य के गठन में आजसू का बड़ा योगदान है. अब एक बार फिर से रणनीति के साथ नयी पारी खेलनी होगी. प्रबल कुमार महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के लिए हुए आंदोलन का डॉक्यूमेंटेशन करना जरूरी है.

झारखंड का सपना अब भी अधूरा : मेघनाथ

डॉक्यूमेंटरी फिल्म मेकर मेघनाथ ने कहा कि हमने वृहद झारखंड का सपना देखा था. जो मिला वह बहुत थोड़ा है. वृहद झारखंड का सपना अब भी अधूरा है. वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा ने कहा कि झारखंड आंदोलन में बड़ी संख्या में लोग शहीद हुए. अभी भी उनके बारे में कोई नहीं जानता. ऐसे लोगों के बारे में जानकारी खोज कर सामने लानी होगी. आगर आजसू नहीं होता, तो आज भी अलग राज्य का सपना पूरा नहीं होता.

यह मूल्यांकन का वक्त : वासवी किड़ो

आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता वासवी किड़ो ने कहा कि यह मूल्यांकन का वक्त है. राज्य, गांव, समाज को आगे बढ़ाने में आजसू की क्या भूमिका हो सकती है, इस पर विचार करना होगा. सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की ने झारखंड आंदोलन से जुड़े कई प्रसंग सुनाये. मौके पर वरिष्ठ जर्नलिस्ट किसलय, राजू महतो, प्रेमशाही मुंडा, ललिल महतो, नीतिशा बेसरा, नीरू शांति भगत आदि मौजूद थे.

आंदोलनकारियों को मिला प्रशस्ति पत्र

समारोह में कई झारखंड आंदोलनकारियों को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया. इनमें शहीद निर्मल महतो, स्व डॉ रामदयाल मुंडा, स्व बीपी केशरी, सूर्य सिंह बेसरा, प्रभाकर तिर्की, अनुज कुमार सिन्हा, वासवी किड़ो, किसलय, मेघनाथ, पंकज मंडल, राजू महतो, रतन तिर्की, बीरबल महतो, ललित महतो आदि शामिल थे.

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Published by: Rajiv kumar

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