स्थानीय नीति : झारखंड में 1985 से रहनेवाले स्थानीय
प्रारूप लेकर दिल्ली गये मुख्यमंत्री रघुवर दास, प्रस्ताव में जिक्र है मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य की स्थानीय नीति का जो प्रस्ताव लेकर दिल्ली गये हैं, अगर इस पर सहमति बन गयी, तो झारखंड में 1985 से रहनेवाले लोग स्थानीय हो जायेंगे. इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बैठकें हुईं. मुख्यमंत्री […]
प्रारूप लेकर दिल्ली गये मुख्यमंत्री रघुवर दास, प्रस्ताव में जिक्र है
मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य की स्थानीय नीति का जो प्रस्ताव लेकर दिल्ली गये हैं, अगर इस पर सहमति बन गयी, तो झारखंड में 1985 से रहनेवाले लोग स्थानीय हो जायेंगे. इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बैठकें हुईं.
मुख्यमंत्री श्री दास, झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन, विपक्ष और गंठबंधन के नेताओं के साथ बैठे भी. इससे पहले प्रारूप को अंतिम रूप देने से पूर्व कई तरह की बातें चर्चा में आयीं. इस बात की भी चर्चा हुई कि सरकार 15-20 साल से झारखंड में रह रहे लोगों को स्थानीय मानेगी. पर अब प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया गया है. सहमति बनते ही सरकार जल्द ही इसकी घोषणा कर देगी.
राज्य गठन के 15 वर्ष पूर्व से रहनेवाले को माना जायेगा स्थानीय
शकील अख्तर
रांची : स्थानीय नीति से संबंधित प्रारूप तैयार हो गया है. राज्य गठन से 15 साल पहले से यानी 1985 से झारखंड में रहनेवाले स्थानीय होंगे. मुख्यमंत्री रघुवर दास मंगलवार को इस प्रारूप को लेकर दिल्ली गये. वहां संभवत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से विचार-विमर्श करेंगे.
पार्टी के वरिष्ठ नेता कड़िया मुंडा से भी मंगलवार रात दिल्ली में मुख्यमंत्री मिले. मुख्यमंत्री के लौटने के बाद इसी माह स्थानीय नीति की घोषणा कर दी जायेगी. कार्मिक विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने सभी क्षेत्रों से मिले सुझावों पर विचार-विमर्श के बाद स्थानीय नीति का प्रारूप तैयार किया है.
स्थानीय नीति में ही नियोजन का प्रावधान : नियुक्तियों के मामले में अलग से नियोजन नीति नहीं बनायी गयी है.कार्मिक विभाग ने स्थानीय नीति में ही नियोजन के प्रावधानों को शामिल किया है. तैयार प्रारूप में कहा गया है कि राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जानेवाली सभी नियुक्तियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित होंगी. यानी राज्य की सरकारी नौकरियों में अराजपत्रित पदों (तृतीय और चतुर्थ वर्ग) पर सिर्फ स्थानीय लोगों को ही नियुक्त किया जायेगा.
इससे राज्य में शिक्षक, सिपाही से दारोगा तक और वार्डन से जेलर तक के पदों पर सिर्फ स्थानीय लोगों की ही नियुक्ति हो सकेगी.
कई बैठकों के बाद बना प्रारूप
स्थानीय नीति को लेकर मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की थी. इस पर पार्टी विधायकों से राय मांगी गयी थी. पार्टी के विधायकों की अलग-अलग राय थी. पार्टी फोरम में कट ऑफ डेट 1995 करने की मांग कई विधायकों ने की थी. इसके बाद इसी माह मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक भी हुई. मुख्यमंत्री ने इस मसले पर बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी राय ली थी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग को स्थानीय नीति का प्रारूप तैयार करने का निर्देश दिया था.
कर्मचारियों के लिए क्या है प्रावधान
प्रारूप में वैसे सरकारी कर्मचारियों को स्थानीय माने जाने की बात कही गयी है, जो यहां से सेवानिवृत हुए हैं या होंगे
राज्य विभाजन के बाद झारखंड के हिस्से में मिले सभी कर्मचारी राज्य के स्थानीय निवासी माने जायेंगे
झारखंड को मिले वैसे कर्मचारी जो मूलत: बिहार के निवासी हैं, उन्हें अपनी स्थानीयता चुनने का विकल्प होगा. वे झारखंड या बिहार में से किसी एक राज्य की स्थानीय नीति का ही लाभ ले सकते हैं
राज्य या केंद्रीय लोक उपक्रमों में कार्यरत सरकारी कर्मचारी भी झारखंड से सेवानिवृति होने के बाद यहां की स्थानीयता का लाभ ले सकते हैं
राज्य के सभी कर्मचारियों/राज्य के लोक उपक्रमों/केंद्रीय लोक उपक्रमों के कर्मचारियों के बच्चों को उस राज्य की स्थानीयता का लाभ मिलेगा, जिसे उनके माता-पिता चुनेंगे
