डकरा.
कोल इंडिया की सबसे पुरानी सब्सिडियरी बीसीसीएल धनबाद में नौकरी दिलाने के नाम पर डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा, भुरकुंडा, हजारीबाग, बड़कागांव आदि क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में एक संगठित गिरोह सक्रिय है. इस गिरोह में शामिल लोगों ने लगभग 200 लोगों से अनुमानित 20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली है. ठगी का जाल ऐसा बुना गया है कि ठगी का शिकार बना हर शख्स एक ठग के रूप में दिखाई दे रहा है. डकरा में रहनेवाली कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने 12 मई को खलारी थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज करायी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि अपने पुत्र मनीष कुमार, कुणाल कुमार और भतीजा कौशल प्रसाद को नौकरी दिलाने के नाम पर 24 लाख रुपये गंवा दिये हैं. बताया गया कि चूरी उत्तरी के पूर्व मुखिया संजय आइंद की पत्नी मीनाक्षी आइंद ने सबसे पहले उन्हें इसके बारे में बताया कि उसकी दोनों बेटी साक्षी और श्रेया बीसीसीएल में नौकरी कर रही है. नौकरी केडी खलारी में रहने वाले पिपरवार के अशोका में कार्यरत सीसीएल कर्मी अजय कुमार सिन्हा पिता कामेश्वर प्रसाद व दरहाटांड़ राय के रहनेवाले पवन कुमार पिता नरेश विश्वकर्मा द्वारा दिलायी गयी है. दोनों से मुलाकात हुई तो पवन ने बताया कि वो खुद सेटिंग करके बीसीसीएल में नौकरी कर रहा है और अपना ज्वाइनिंग लेटर दिखाया. इंदिरा देवी ने बताया है कि पवन डकरा विश्वकर्मा मोड़ के एक चर्चित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है, इसलिए मैं उस पर विश्वास कर ली. दोनों के कहने पर उन्होंने पवन, अजय और मीनाक्षी को एक चेक दी और विश्वास के तौर पर उसका फोटो खिंचवा ली. फोटो लेते समय मीनाक्षी छुप रही थी, जिसको लेकर थोड़ा शक हुआ, लेकिन बाद में तकनीकी कारणों से वह उस चेक से पैसे नहीं निकल पाये. इसके बाद इन्हीं लोगों के कहने पर पश्चिम बंगाल जलपाईगुड़ी राॅयल पार्क अपार्टमेंट निवासी सागर चक्रवर्ती पिता विजय कुमार चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक अकाउंट में 24 लाख रुपये डाले. पैसा भेजने के बाद एक बांड पेपर बनाया गया, जिसमें सभी के हस्ताक्षर हैं. इसके बाद धनबाद बुलाकर मेरे तीनों बच्चों को एक होटल में ठहराया गया, फिर धनबाद पीएमसीएच में रवि राॅय और मुकेश महतो द्वारा मेडिकल जांच करायी गयी. उस समय वहां और भी बहुत सारे बच्चों की जांच करायी जा रही थी. इसके बाद फार्म भरवाये गये. दोबारा धनबाद बुला कर लोदना एरिया के रेलवे साइडिंग ले जाकर अनूप सरकार, विशाल सिंह, रवि राॅय द्वारा बायोमेट्रिक हस्ताक्षर और बीटीसी ट्रेनिंग की प्रक्रिया पूरी करायी गयी. इतना होने के बाद ज्वाइनिंग लेटर तो नहीं दिया गया, लेकिन लगभग 200 बच्चों का लिस्ट दिखाया गया, जिन्हें अलग-अलग एरिया में पोस्टिंग दी गयी थी. इसमें मेरे तीनों बच्चों का नाम भी था, लेकिन इसके बाद सभी ने मुझसे बातचीत करना और फोन रिसीव करना बंद कर दिया. मैं पवन, अजय और मीनाक्षी से लगातार बात करती रही, लेकिन जब लगा कि वो ठग ली गयी हूं, तो मुकदमा दर्ज कराना इसलिए भी जरूरी समझी, ताकि और भी लोग ठगी से बच सकें. मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को जैसे ही नोटिस जारी किया. वैसे ही गिरोह में शामिल लोगों ने अपना तरह का सभी संपर्क माध्यम बंद कर दिया है. जिसके कारण ठगी का शिकार बने लगभग 200 लोग परेशान हैं.नेटवर्किंग मार्केट की तरह जाल बुना गया
गिरोह चलाने वाले लोगों ने इस ठगी के जाल को पूरी तरह नेटवर्किंग मार्केट की तरह संचालित किया और इसके कई चैनल बनाये गये. ठगी का शिकार बने और ठगने का कई आरोपियों से पूछताछ करने के बाद अभी तक एक चैनल सागर चक्रवर्ती और दूसरा मुस्तकीम अंसारी द्वारा चलाया गया बताया जा रहा है. सागर शानवी इंटरप्राइजेज बैंक अकाउंट में और मुस्तकीम धनबाद की एक टायर दुकान के बैंक अकाउंट में पैसे लिये हैं. इस काम में शामिल हुए लोग पहले खुद नौकरी करने की लालच में पैसे दिये और बाद में उन्हें समझाया गया कि वे कैंडिडेट खोजें, ताकि उनका काम बगैर पैसे दिये हो जाये, इस लालच में लोगों ने अंधाधुंध अभियान चला कर लोगों को फंसाया. बहुत लोगों ने कैंडिडेट से खुद बैंक अकाउंट में पैसे लिये, लेकिन उपर के लोगों को नकद राशि दे दिये.पांच करोड़ रुपए दे दिये
पिपरवार के एक व्यक्ति ने कलेक्शन कर पांच करोड़ रुपए दे दिये, तो डकरा के एक सीसीएल कर्मी ने अपने रिश्तेदारों से कलेक्ट कर 75 लाख रुपये दे दिये हैं. ऐसे लोग अब बहुत तनाव में हैं.
धनबाद के सिजुआ से जुड़ा है तार
धनबाद के सिजुआ से गिरोह के लोगों का तार जुड़ा हुआ है. मुस्तकीम अंसारी से ठगी का शिकार बने लोगों ने बताया कि वह सिजुआ का रहनेवाला है और अपने आप को कांग्रेस पार्टी एवं ट्रेड यूनियन नेता बताता है. वहीं सागर चक्रवर्ती अपने आप को टीएमसी का नेता बताता है.इन नामों की भी चर्चा है
संतोष सिंह धनबाद, छोटेलाल राम, मुकेश महतो टंडवा, विशाल कुमार, राजेश करमाली, भुरकुंडा, करमा के नाम की भी खूब चर्चा है.
