रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
Hemant Soren, रांची : झारखंड की राजधानी रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन सभागार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा चयनित नवनियुक्त इंटर प्रशिक्षित और स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों (शिक्षकों) तथा महिला पर्यवेक्षिकाओं को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपा. कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र पाकर चयनित अभ्यर्थियों के चेहरे खिल उठे. मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त युवाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य की बधाई दी और राज्य के नवनिर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया.
कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों को मिला नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समारोह में कुल 316 सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया. इसमें 1 से 5 तक की कक्षा के लिए कुल 160 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया. वहीं, 6 से 8 तक की कक्षा के लिए 156 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया. इसके अतिरिक्त, राज्य की सामाजिक सुरक्षा और बाल विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को भी जिम्मेदारी दी गई.
कुपोषण राज्य पर ‘काला धब्बा’: मुख्यमंत्री
नियुक्ति पत्र वितरण के बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की कई महत्वपूर्ण चुनौतियों और संभावनाओं पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, बस राज्य के बच्चों की प्रतिभा को सही समय पर तराशने की आवश्यकता है. राज्य की एक बड़ी भौगोलिक समस्या का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने भावुक होकर कहा कि हमारे राज्य में कुपोषण एक ‘अभिशाप’ और ‘काले धब्बे’ की तरह है. यह एक ऐसी गंभीर समस्या है जो बच्चे के जन्म लेते ही उसके पूरे जीवन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है.” सीएम ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस अभिशाप से राज्य को बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. उन्होंने हाल ही में नियुक्त हुई महिला पर्यवेक्षिकाओं को निर्देशित किया कि इस कुपोषण रूपी चुनौती को समाप्त करने में उनकी भूमिका सबसे अहम होने वाली है.
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झारखंड की 50 से 60 लाख महिलाओं को दी जा रही आर्थिक सहायता
अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता साझा करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने ‘मैया सम्मान योजना’ का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग 50 से 60 लाख महिलाओं को इस योजना के तहत हर महीने सीधे आर्थिक सहायता दी जा रही है. इसका एक जीवंत देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी योजना से सहयोग पाकर एक अनाथ बच्ची ने कड़ी मेहनत की और आज वह डिप्टी कलेक्टर के प्रतिष्ठित पद तक पहुंच चुकी है. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी स्कूलों के बदलते स्वरूप की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य के ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों’ (Schools of Excellence) के प्रति जनता में भारी उत्साह है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र 10,900 सीटों के लिए इस बार लगभग 35,000 से 40,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लौटते भरोसे का प्रतीक है.
घर की चारदीवारी से बाहर निकलें महिलाएं : हेमंत सोरेन
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है. उनका मानना है कि यदि आधी आबादी (महिलाएं) पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चलेगी, तो राज्य और देश का समग्र विकास कभी संभव नहीं हो सकता. इसके साथ ही, उन्होंने कुछ शिक्षकों की कार्यशैली पर चिंता भी व्यक्त की. मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि शिक्षक दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवा देने से कतराते हैं. उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि जिम्मेदारी से भागे बिना विकास मुमकिन नहीं है. शिक्षकों को सुदूर और दुर्गम स्थानों पर भी जाकर बच्चों को निखारने और उन्हें एक बेहतर जीवन देने की इस चुनौती को सहर्ष स्वीकार करना होगा. उन्होंने उपस्थित लोगों को एक सामूहिक संकल्प भी दिलाया कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम दो अन्य व्यक्तियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार करें.
सीएम हेमंत ने केंद्र पर साधा निशाना
राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के रोजगार संकट पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आज जहां पूरे देश में विभिन्न राज्यों में पेपर लीक और नियुक्तियां बाधित हुई है, इस कारण युवा हताश और परेशान हैं. वहीं, झारखंड सरकार ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने कार्यकाल में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों को मिलाकर लगभग डेढ़ से दो लाख स्थानीय युवाओं को रोजगार और नियुक्तियां देने का ऐतिहासिक काम किया है. अंत में, शिक्षकों को उनके दायित्व का बोध कराते हुए मुख्यमंत्री ने एक बेहद सुंदर उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, “शिक्षक बच्चों को समाज और देश के लिए किसी भी रूप में ढाल सकते हैं, ठीक उसी तरह जैसे एक कुशल शिल्पकार लकड़ी को तराशकर उसे कोई भी सुंदर आकार दे देता है.” उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी नवनियुक्त सहायक आचार्य पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे.
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