Education News : रांची वीमेंस कॉलेज में महिला और एआइ पर 20 घंटे की कार्यशाला

रांची वीमेंस कॉलेज में महिला और एआइ विषय पर 20 घंटे की कार्यशाला संपन्न हो गयी. इस अवसर पर प्राचार्या डॉ सुप्रिया ने कहा कि एआइ प्रयोग का विकास छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करने में फायदेमंद होगा.

रांची (विशेष संवाददाता). रांची वीमेंस कॉलेज में महिला और एआइ विषय पर 20 घंटे की कार्यशाला संपन्न हो गयी. इस अवसर पर प्राचार्या डॉ सुप्रिया ने कहा कि एआइ प्रयोग का विकास छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करने, उन्हें उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करने में अत्यधिक फायदेमंद होगा. डेल के सीएसआर कार्यक्रम के सहयोग से लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन की पहल का उद्देश्य कौशल अंतर को पाटना और प्रौद्योगिकी में महिलाओं के लिए अधिक अवसर पैदा करना है. कॉलेज की प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सेल अधिकारी डॉ रोहिता विकास ने बताया कि वर्तमान में नौकरी बाजार के लिए आवश्यक अत्याधुनिक तकनीकी कौशल के साथ छात्रों को सशक्त बनाता है. दो बैचों में आयोजित कार्यशाला के प्रमुख प्रशिक्षक रजनीश कुमार ने प्रमुख तकनीकी डोमेन पर ध्यान केंद्रित किया. प्रतिभागियों को उन्नत एक्सेल ऑटोमेशन, डैसबोर्ड निर्माण और डाटा परिवर्तन के लिए पावर बीआइ और मशीन लर्निंग के लिए पायथन प्रोग्रामिंग, वर्गीकरण आदि की व्यावहारिक जानकारी दी गयी. इस अवसर पर डॉ डॉली, डॉ सुरभि आदि उपस्थित थीं. कार्यशाला में शामिल शिक्षिकाओं व छात्राओं के बीच सर्टिफिकेट वितरण किया गया.

रांची वीमेंस कॉलेज में पुस्तक लोकार्पण

रांची. रांची वीमेंस कॉलेज में हिंदी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ उर्वशी द्वारा लिखित पुस्तक हिंदी के बाल-साहित्य पर भूमंडलीकरण का प्रभाव का प्राचार्या डॉ सुप्रिया व प्रोफेसर इंचार्ज डॉ विनिता सिंह ने लोकार्पण किया. इस अवसर पर डॉ सुप्रिया ने कहा कि यह पुस्तक न केवल हिंदी साहित्य के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बाल-साहित्य पर वैश्वीकरण के प्रभावों को समझने के लिए भी एक आवश्यक पहल है. डॉ विनिता सिंह ने कहा कि भारतीय समाज में सदियों से मौखिक कथा परंपरा, पंचतंत्र, जातक कथाएं और लोककथाएं बच्चों के मनोरंजन और नैतिक शिक्षा का प्रमुख स्रोत रही हैं. 1990 के बाद जब भारत में उदारीकरण एवं वैश्वीकरण बढ़ा, तब विदेशी लेखकों की पुस्तकें, डिजनी एवं कार्टून नेटवर्क जैसे चैनलों का प्रभाव बढ़ा.

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