संज्ञान लेने से कोर्ट का इनकारकोर्ट की आपत्तिधारा 173 (2) के प्रावधानों का अनुपालन नहीं हुआआरोपपत्र दाखिल करने से पहले शाह को गिरफ्तार करने का प्रयास नहीं किया गयानिषेधाज्ञा लगानेवाले अधिकारी ने शिकायत नहीं की है एजेंसियां, मुजफ्फरनगरउत्तरप्रदेश पुलिस को गुरुवार को उस समय विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ा जब शहर की एक अदालत ने कथित रूप से घृणा फैलानेवाले भाषण के सिलसिले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया और उसे पुलिस को लौटा दिया. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुुंदर लाल ने शाह के खिलाफ आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया क्योंकि पुलिस ने आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (2) के प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया था. इसके तहत अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने से पहले आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रयास करना होता है. अदालत ने कहा कि पुलिस ने आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (2) के प्रावधानों के तहत वारंट या कुर्की प्रक्रिया का आग्रह नहीं किया. अदालत ने त्रुटि हटाने के लिए आरोपपत्र लौटाते हुए कहा कि पुलिस भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकती, क्योंकि इसे संबंधित अधिकारी की ओर से एक निजी शिकायत के रूप में दाखिल करना होगा, जिसने निषेधाज्ञा लागू की और जिसका उल्लंघन हुआ. पुलिस ने यहां लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित रूप से घृणा फैलानेवाला भाषण देने के सिलसिले में भाजपा अध्यक्ष को बुधवार को आरोपित किया था.शाह के खलाफ आरोपउल्लेखनीय है कि 49 वर्षीय शाह के खिलाफ धर्म, नस्ल, जाति और समुदाय के आधार पर कथित रूप से वोट मांगने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (3) और लोकसेवक की तरफ से लगायी निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत आरोप लगाये गये थे. आरोपपत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म, नस्ल, जन्मस्थल इत्यादि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाना), 295-ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावना भड़काने की मंशा से जानबूझ कर दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और 505 (विद्रोह कराने या जन शांति के खिलाफ अपराध की मंशा से झूठे बयान, अफवाह, इत्यादि फैलाना) और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123-3 (धर्म के आधार पर मतदान करने की अपील करना) के तहत शाह को आरोपित किया गया था.चुनाव आयोग ने दिया था निर्देशपुलिस ने शाह के खिलाफ कथित रूप से आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में निर्वाचन आयोग से मिले निर्देश के तहत मामला दर्ज किया था. आयोग ने चार अप्रैल को शाह पर राज्य में प्रचार करने पर भी पाबंदी लगा दी थी. लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान चार अप्रैल को मुजफ्फरनगर में नयी मंडी क्षेत्र के भावना पैलेस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में अमित शाह पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था. शाह ने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र किये बिना कहा था कि यह चुनाव सम्मान के बदले का चुनाव है.
झटका. अमित शाह के खिलाफ पुलिस की चार्जशीट में खामियां
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