शकील अख्तर
रजिस्टर-2 में गलत तरीके से जमीन की इंट्री की गयी
रांची : जालसाजी कर करीब 200 एकड़ गैरमजरूआ व बकाश्त जमीन का लगान निर्धारित कर दिया गया है. साथ ही रजिस्टर-2 में जमीन के ब्योरे की इंट्री कर दी गयी है. लगान निर्धारित करने के इस मामले में एनआइसी और बड़ागाईं अंचल के अधिकारी व कर्मचारी आमने-सामने हैं. जालसाजी के इस मामले में अंचलाधिकारी की ओर से एनआइसी को दोषी बताया जा रहा है.
दूसरी तरफ, एनआइसी की ओर से इसके लिए अंचल के अधिकारी व कर्मचारी को दोषी बताया जा रहा है. मामले की गंभीरता के देखते हुए भू-राजस्व एवं निबंधन सचिव केके सोन ने इसकी जांच साइबर क्राइम शाखा से करने का आदेश दिया है. राजधानी में जमीन के मामले में की गयी जालसाजी का यह दूसरा बड़ा मामला है. इससे पहले रजिस्ट्री ऑफिस से मूल दस्तावेज गायब कर जमीन की हेराफेरी करने का मामला प्रकाश में आ चुका है.
अंचलाधिकारी ने सरकार से की मामले की शिकायत : बड़ागाईं अंचल में अंचलाधिकारी की सहमति के बिना ही करीब 200 एकड़ गैरमजरूआ व बकाश्त जमीन का लगान निर्धारित करते हुए रजिस्टर-2 में इंट्री किये जाने का मामला पकड़ में आया है. सरकार से की गयी शिकायत में अंचलाधिकारी ने कहा है कि लगान निर्धारित दिखाते हुए रजिस्टर-2 में इसकी इंट्री करने में बड़े पैमाने पर जालसाजी की गयी है.
एनआइसी के स्तर से अंचल की सहमति के बिना ही लगान निर्धारण को सही करार देते हुए रजिस्टर-2 में इसकी इंट्री कर दी गयी है. हालांकि संबंधित मामले में इसके लिए अंचल कार्यालय में किसी ने आवेदन ही नहीं दिया है. एनआइसी ने अंचल की अनुमति या सहमति के बिना ही ऐसा कर दिया है.
इसलिए अंचल की जानकारी के बिना ही रजिस्टर-2 में जमीन की इंट्री करने के मामले में एनआइसी के स्तर पर व्यापक गड़बड़ी की गयी है. अंचल की ओर से इस बात की भी शिकायत की गयी है कि रजिस्टर-2 में नये नाम की इंट्री के समय अंचलाधिकारी के नंबर पर ओटीपी भी नहीं भेजा गया. रजिस्टर-2 की इंट्री में प्लॉट नंबर तो है, लेकिन खाता नंबर में शून्य लिखा हुआ है. जबकि किसी भी राजस्व गांव में खाता नंबर शून्य नहीं होता है.
गड़बड़ी का उदाहरण
बड़ागाईं अंचल के रजिस्टर-2 में दर्ज ब्योरे के अनुसार, हलका नंबर-4, बूटी गांव के भाग संख्या एक के पेज संख्या 393 पर रैयत के रूप में सुरेंद्र नाथ ओहदार (पिता- स्वर्गीय विशेश्वर नाथ ओहदार) दर्ज है. इस जमीन के म्यूटेशन का रिकाॅर्ड कार्यालय में नहीं है. रजिस्टर-2 में खाता नंबर शून्य में कुल 10.28 जमीन होने का उल्लेख किया गया है.
इस जमीन पर वित्तीय वर्ष 1984-85 से लगान बकाया दिखाया जा रहा है. अंचल के दस्तावेज के अनुसार, इस जमीन पर 1984-85 से 2019-20 तक का 176.40 रुपये बकाया है. हालांकि, सरकार द्वारा पाबंदी लगाये जाने की वजह से अब लगान का भुगतान करना संभव नहीं हो रहा है. इसी तरह खाता नंबर शून्य में विमला प्रसाद के नाम पर 0.40 एकड़, विनम्रता प्रसाद के नाम पर 0.40 एकड़ और विशाल प्रसाद के नाम पर भी 0.40 एकड़ जमीन की इंट्री रजिस्टर-2 में है. इन तीनों पर वर्ष 2014-15 से लगान बकाया दिखाया गया है.
पृष्ठ 393 पर दर्ज जमीन
खाता नंबर क्षेत्रफल (एकड़ में)
697 0.16
436 4.17
537 0.28
127 0.82
1071 0.70
540 0.72
988 0.11
1134 0.36
1063 0.33
1064 0.07
एनआइसी ने कहा : हमारे स्तर से गड़बड़ी नहीं
अंचल की ओर से सरकार को मिली इस शिकायत के बाद मामले में एनआइसी से जानकारी मांगी गयी. एनआइसी ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकार को अपना जवाब भेज दिया है.
कहा है कि एनआइसी के स्तर पर किसी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही नहीं बरती गयी है. अंचल की ओर से सहमति के बिना ही एनआइसी के स्तर से इंट्री करने की बात कही गयी, वह सही नहीं है.
अंचल कार्यालय ने जिन मामलों में अनभिज्ञता जतायी है, उन सभी मामलों से जुड़ी रिपोर्ट में कर्मचारी, सीआइ और अंचलाधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर हैं. इसलिए पूरे प्रकरण में एनआइसी की कोई गलती नहीं है. एनआइसी द्वारा अपना पक्ष पेश किये जाने के बाद सचिव ने साइबर क्राइम शाखा से जांच कराने का आदेश दिया है. संबंधित जमीन पर लगान रसीद जारी करने पर भी रोक लगा दी गयी है.
