एक सपने का अंत :शुरू होने से पहले ही बर्बाद हो गया 100 करोड़ का मेगा फूड पार्क, पढ़ें यह खास रिपोर्ट

सुनील चौधरी रांची : रांची के गेतलसूद में सौ करोड़ की लागत से बना झारखंड मेगा फूड पार्क खुलने के पहले ही बंद हो गया. यह एक सपने की मौत है. एक ऐसा फूड पार्क जिसके खुलने की संभावना से ही किसानों के चेहरे पर मुस्कान छा गयी थी. 25 हजार किसान सपने संजोने लगे […]

सुनील चौधरी
रांची : रांची के गेतलसूद में सौ करोड़ की लागत से बना झारखंड मेगा फूड पार्क खुलने के पहले ही बंद हो गया. यह एक सपने की मौत है. एक ऐसा फूड पार्क जिसके खुलने की संभावना से ही किसानों के चेहरे पर मुस्कान छा गयी थी.

25 हजार किसान सपने संजोने लगे थे. इसके खुलने से 5700 लोगों को रोजगार मिलता. झारखंड की सब्जियां झारखंड में ही प्रोसेस्ड होती. किसानों के टमाटर सड़क पर फेंके नहीं जाते, बल्कि सॉस बनकर हमारे किचन में आ जाते. आलू चिप्स, मकई कॉर्न फ्लेक्स या स्वीट कॉर्न खुद बनाते. गोभी, मटर, पत्ता गोभी, गाजर को औने-पौने दामों में बेचना नहीं पड़ता, बल्कि ये उचित मूल्य पर बिकते और किसानों की आय दोगुनी नहीं, चार गुनी होती.

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यह एक सपना था. एक ऐसा सुखद सपना, जो 11 वर्ष पहले झारखंड ने देखा था, जब तामझाम से गेतलसूद की 56 एकड़ जमीन पर इसकी आधारशिला रखी गयी थी. 15 फरवरी को 2016 को इसका उदघाटन किया गया. लेकिन फिर झारखंड मेगा फूड पार्क खुलने से पहले ही बंद हो गया. अब फूड पार्क अपनी बदहाली पर रो रहा है.
सपनों की जमीन पर घास और झाड़ियां : सपनों की जमीन मेगा फूड पार्क अब पूरी तरह बदहाल हो चुका है. अब वहां धीरे-धीरे घास और झाड़ियों का मैदान बनता जा रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गयी मशीनें अब जंग खा रही हैं. कोल्ड स्टोरेज बर्बाद हो गया है. जहां-तहां से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आयी है. छतें चू रही हैं. शेड जर्जर हो चुके हैं.
100 करोड़ है इसकी लागत : हाल ही में इलाहाबाद बैंक द्वारा इसक मूल्यांकन कराया गया था. जिसमें इसकी परिसंपत्ति 100 करोड़ की आंकी गयी थी. हालांकि अब यह एनसीएलटी और प्रमोटर पर निर्भर करता है कि कितनी रकम में इसे बेचा जाता है. इसमें 43 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने अनुदान के रूप में दिये थे और बैंक का कर्ज करीब 40 करोड़ रुपये का है.
एक सपने का अंत : एनसीएलटी ने कॉरपोरेट दिवालिया घोषित कर समाधान की प्रक्रिया शुरू की
अब खोजा जा रहा है प्रोमोटर
झारखंड मेगा फूड पार्क के बैंकरप्ट होने के बाद पहले तो इलाहाबाद बैंक ने उसे अपने कब्जे में लिया. फिर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के कब्जे में चला गया. अब इसे दिवालिया घोषित करते हुए कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोसेस यानी दिवालिया समाधान की प्रक्रिया आरंभ कर दी गयी है. यानी इसके संचालन के लिए कोई प्रोमोटर मिले, इसकी तलाश शुरू की जायेगी. झारखंड मेगा फूड पार्क के बोर्ड अॉफ डायरेक्टर्स के सारे अधिकार जब्त कर लिये गये हैं. एनसीएलटी द्वारा कोलकाता के नीरज अग्रवाल को इंटरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया गया है. उनके द्वारा मेगा फूड पार्क में नोटिस चिपका दिया गया है. फिर कोई प्रमोटर की तलाश की जायेगी, जो इसे खरीद सके.

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