रांची : देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है. यहां पर छह लाख हेक्टेयर में आलू की खेती होती है. इससे सालाना 150-160 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है. जबकि इतने उत्पादन को भंडारित करने की क्षमता भी है. यूपी के आलू की क्वालिटी बेहतर होने से रांची में इसे काफी पसंद किया जा रहा है. कुल खपत के बाद उत्पादन का लगभग 40-45 प्रतिशत आलू सरप्लस बच जाता है, इसे दूसरे राज्यों में भेजा जाता है.
रांची में पसंद किया जा रहा यूपी का आलू : तोमर
रांची : देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है. यहां पर छह लाख हेक्टेयर में आलू की खेती होती है. इससे सालाना 150-160 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है. जबकि इतने उत्पादन को भंडारित करने की क्षमता भी है. यूपी के आलू की क्वालिटी बेहतर होने से रांची में इसे काफी […]

यह बातें उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक आरके तोमर ने शुक्रवार को होटल ट्राइडेंट इन में आयोजित पोटैटो बायर-सेलर मीट में कही. यह आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार और हॉफैड ने किया था. उन्होंने कहा कि यूपी के लाल आलू की वेराइटी ‘सी-1’ और सफेद आलू की वेराइटी ‘कुफरी बहार’ है. ख्याति वेराइटी का आलू भी काफी पसंद किया जाता है.
झारखंड में 49 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती : हॉर्टिकल्चर, झारखंड के निदेशक (मिशन) विजय कुमार ने कहा कि झारखंड में 49 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है. हजारीबाग, रांची, लोहरदगा और नेतरहाट के आसपास इलाकों में ही खपत हो जाती है. यहां पर अच्छे मूल्य भी मिल जाते हैं. बिहार के कुछ क्षेत्रों में भी आलू जाता है. झारखंड में आलू की कमी है. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से आलू मंगाना पड़ रहा है.
बढ़ी है यूपी के आलू की खपत : आलू-प्याज थोक विक्रेता संघ के महासचिव मदन कुमार ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों में यूपी के आलू की खपत बढ़ी है. हॉलैंड आलू और इटावा के आलू की भी अच्छी डिमांड है. मौके पर झारखंड चेंबर के उपाध्यक्ष प्रवीण जैन, संघ के अध्यक्ष रामलखन साहू, पंकज कुमार सहित कई व्यापारी और किसान उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन हॉफेड के मार्केटिंग इंचार्ज शैलेंद्र कुमार सुमन ने किया.