एक छोटे से गांव में उसका जन्म हुआ था़ उसकी मां गांव की एक गरीब लड़की थी़ पिता बढ़ई़ स्कूल वह कभी गया नही़ं पैदल धूल भरे रास्तों पर चला़ उसकी बातें सुनने गरीब, मजदूर, किसान और आम लोग आये़
धर्म गुरुओं ने उसका अपमान किया़ उसे मंदिरों से खदेड़ा. कभी पत्थरों से मारना चाहा़ उसका उठना-बैठना, मिलना-जुलना उन लोगों के साथ था, जिन्हें बाकी लोग पापी और असामाजिक समझते थे़ उनके साथ वह रोटी खा लेता था़ उसने भूखों पर तरस खाया. अंधों को दृष्टिदान दिया़ बीमार, लाचार और कोढ़ ग्रस्त लोगों को गले लगाया़ उसके अपने ही एक साथी ने उसे 30 सिक्कों के बदले बेच दिया़
उसने अपने आप को स्वेच्छा से सैनिकों, फरीसियों और धर्म गुरुओं के हवाले किया़ उसे कलवारी नामक पहाड़ी पर क्रूस पर कीलों से ठोंक कर मार डाला़ मरने के तीसरे दिन तक वह कब्र में नहीं था़ वह जी उठा था़ स्वर्ग जाने के पहले उसने अपने साथियों से कहा : स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मैंने तुम लोगों को दे दिया है़ 2000 साल से ज्यादा बीत गया है़ यीशु मसीह का अधिकार और उसकी शक्ति दुनिया के हर पटल पर दिखाई देती है़
फादर अशोक कुजूर, डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक
