रांची : 80 हजार में होनेवाली स्टोन की सर्जरी अब रिम्स में होगी मुफ्त

पीसीएनएल विधि से इसी माह शुरू होगा ऑपरेशन यूरोलॉजी विभाग मेें मशीन का किया जा रहा है इंस्टॉलेशन रांची : रिम्स में किडनी स्टोन की सर्जरी अब अत्याधुनिक विधि परक्यूटेनीयस नैफ्रोलीथोटॉमी (पीसीएनएल) से की जायेगी. इसके लिए यूरोलॉजी विभाग मेें मशीन मंगा ली गयी है. मशीन के इंस्टॉलेशन का कार्य चल रहा है. इस माह […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
पीसीएनएल विधि से इसी माह शुरू होगा ऑपरेशन
यूरोलॉजी विभाग मेें मशीन का किया जा रहा है इंस्टॉलेशन
रांची : रिम्स में किडनी स्टोन की सर्जरी अब अत्याधुनिक विधि परक्यूटेनीयस नैफ्रोलीथोटॉमी (पीसीएनएल) से की जायेगी. इसके लिए यूरोलॉजी विभाग मेें मशीन मंगा ली गयी है. मशीन के इंस्टॉलेशन का कार्य चल रहा है. इस माह के अंत तक सर्जरी शुरू होने की उम्मीद है. पीसीएनएल विधि से निजी अस्पताल में स्टोन की सर्जरी कराने पर 70 से 80 हजार रुपये का खर्च आता है. वहीं रिम्स में यह सर्जरी मुफ्त में की जायेगी.
यूरोलॉजी विभाग में वर्तमान में लेप्रोस्कोपिक व सामान्य विधि से स्टोन की सर्जरी की जाती है. स्टोन के 25 से 30 मरीज हर माह इलाज के लिए रिम्स आते हैं. पीसीएनएल विधि से सर्जरी के इच्छुक मरीजों को एम्स या अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है. अब मशीन के आने से मरीजों की सर्जरी पीसीएनएल विधि से रिम्स में ही की जायेगी.
बिना चीरा लगाये दूरबीन से की जाती है सर्जरी : पीसीएनएल विधि में दूरबीन के माध्यम से छोटा छेद किया जाता है. चीरा नहीं लगाना पड़ता है. दूरबीन द्वारा स्टोन को तोड़ दिया जाता है, जो पेशाब के रास्ते बाहर निकल आता है. इससे रक्तस्राव का खतरा कम रहता है. मरीज को अस्पताल से जल्द छुट्टी मिल जाती है. दवा का खर्च भी कम आता है.
सर्जरी विभाग में अब सप्ताह में तीन दिन ऑपरेशन करेंगे सर्जन
रांची : रिम्स में सामान्य सर्जरी के लिए मरीजों को अब ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा. सर्जरी विभाग में सर्जन के ऑपरेशन का दिन बढ़नेवाला है. प्रत्येक सर्जन को सप्ताह में एक-एक दिन अतिरिक्त सर्जरी करने का मौका मिलेगा. वर्तमान में प्रत्येक सर्जन सप्ताह में दो दिन ऑपरेशन करते हैं. पीडियाट्रिक सर्जरी व यूरोलॉजी विभाग का ऑपरेशन थियेटर सुपर स्पेशियालिटी बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया है. इससे सामान्य सर्जरी विभाग में एक ऑपरेशन थियेटर खाली हो गया है.
सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आरजी बाखला ने बताया कि एक ओटी खाली हो गया है. इस कारण एक सर्जन अब तीन दिन ऑपरेशन कर पायेंगे. बुधवार को ऑपरेशन का रोस्टर तैयार कर दिया जायेगा. ऑपरेशन का दिन बढ़ जाने से सप्ताह में 20 अतिरिक्त मरीजाें का मेजर ऑपरेशन किया जायेगा. वहीं 30 से 40 छोटी सर्जरी भी की जा सकती है. गौरतलब है कि एक सर्जन ऑपरेशन की तिथि के दिन चार से पांच मेजर व सात से आठ माइनर सर्जरी करते हैं.
‘लक्ष्य’ प्रमाणपत्र देने को लिए एम्स की टीम ने किया रिम्स के लेबर रूम का निरीक्षण
रांची : रिम्स के स्त्री एवं प्रसूति विभाग को ‘लक्ष्य’ का राष्ट्रीय प्रमाण पत्र देने के लिए मंगलवार को एम्स की दो सदस्यीय टीम ने निरीक्षण किया. टीम में शामिल एम्स के गायनी विभाग की डॉ अर्चना शर्मा व डॉ अनुभूति ने लेबर रूम का जायजा लिया. लेबर रूम की व्यवस्था को देखकर टीम प्रसन्न हुई, लेकिन रेफर होकर आयी गर्भवती महिलाओं के दस्तावेज को देख कर टीम ने नाराजगी जतायी. टीम की सदस्यों ने कहा कि गर्भवती महिला किस समस्या को लेकर रिम्स आयी है, यहां किन-किन दवाओं का उपयोग किया गया है व किस परिस्थिति में उसे रिम्स रेफर किया गया. इसका पूरा ब्योरा नहीं है. मातृ-शिशु मृत्यु दर के बढ़ने का यही सबसे बड़ा कारण है.
सही से इसकी रिपोर्टिंग होनी चाहिए. लेबर रूम का निरीक्षण करने के बाद टीम ने गायनी विभाग के सेमिनार हॉल में डॉक्टर व नर्स के साथ बैठक की. सूत्रों की मानें, तो बुधवार को टीम रिम्स के कुछ अन्य विभाग का निरीक्षण करेगी. इसके बाद रांची जिला के आसपास के स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी व लेबर रूम के इंचार्ज के साथ बैठक करेगी. प्रभारी व लेबर रूम के इंचार्ज को रेफर करने के तरीके बताये जायेंगे.
पीसीएनएल विधि में दूरबीन से स्टोन को बिना चीरा लगाये तोड़ दिया जाता है, जो पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है. रिम्स में यह सुविधा इस माह के अंत तक शुरू हो जायेगी. मशीन मंगा ली गयी है. मरीजों का ऑपरेशन नि:शुल्क होगा.
डॉ अरशद जमाल, यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष, रिम्स
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