रांची : राजधानी की सफाई व्यवस्था पटरी पर आ सके, इसके लिए रांची नगर निगम हर माह चार करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था पटरी पर आने के बजाय पटरी से उतरती दिख रही है.
हालत यह थी कि छठ पर्व से 72 घंटे पहले तक पूरा शहर कूड़ेदान बना हुआ था. लेकिन रात-दिन सफाईकर्मियों के काम करने व वरीय पदाधिकारियों द्वारा गली मोहल्ले के निरीक्षण के कारण शहर से कचरे का उठाव हुआ. नतीजा छठ व्रती भी अपने घर से साफ-सुथरी सड़कों से होते हुए घाट तक पहुंच सके.
डोर टू डोर सेवा अब भी बदहाल : शहर की मुख्य सड़कों पर जमा कचर नगर निगम अपने वाहनों से किसी प्रकार उठा ले रहा है, लेकिन डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की हालत अब भी बदहाल है. अब भी शहर के 60 प्रतिशत से अधिक घरों से कूड़ा का उठाव नहीं हो रहा है.नतीजतन लोग मजबूरी में खुले या नाली में कचरा फेंक रहे हैं. इससे शहर गंदा होने के साथ-साथ नालियां भी जाम हो रही हैं.
33 वार्डों में सफाई करती थी कंपनी, खर्च मात्र 85 लाख : चार माह पहले तक निगम के 53 में से 33 वार्ड में एसेल इंफ्रा कंपनी सफाई का काम संभालती थी. 33 वार्डों में सफाई करने के एवज में निगम कंपनी को प्रतिमाह 85 लाख रुपये का भुगतान करता था. वर्तमान में शहर के 53 वार्डों की सफाई में नगर निगम भले ही चार करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर रहा हो, इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है.
महापर्व छठ शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो गया. अब जिन घाटों में गंदगी या पूजन सामग्री जमा है. उन घाटों में दोबारा सफाई अभियान चलाया जायेगा. किसी भी हाल में घाटों को गंदा नहीं होने दिया जायेगा.
संजीव विजयवर्गीय, उपमहापौर, रांची
