सुनील चौधरी
अगरबत्ती पर आयात शुल्क बढ़ने पर वियतनाम के औद्योगिक संगठन कर रहे हैं विरोध
19 को उद्योग सचिव 10 बांस कारीगर को लेकर वियतनाम जाने वाले थे
रांची : 19 अक्तूबर को झारखंड से 10 बांस कारीगरो को वियतनाम जाने से रोक दिया गया. वियतनाम में भारतीय दूतावास ने वहां की अगरबत्ती उद्योगों में चल रहे विरोध प्रदर्शन के चलते झारखंड के प्रतिनिधिमंडल को वियतनाम आने से रोक दिया और बाद में आने का सुझाव दिया. इसके बाद वियतनाम जाने का दौरा रद्द कर दिया गया. गौरतलब है कि उद्योग सचिव के रविकुमार, मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के सीइओ अजय कुमार सिंह, उपनिदेशक जॉन कोनगारी व 10 बांस कारीगर समेत कुछ उद्यमी भी वियतनाम जाने वाले थे. ये सभी बांस उद्योग की तकनीक देखने जा रहे थे ताकि उस तकनीक के इस्तेमाल से झारखंड में उत्पादों को बढ़ा सके.
क्यों नाराज हैं वियतनाम के उद्यमी
गौरतलब है कि भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा देश के अगरबत्ती उद्योग को बचाने के लिए कुछ कदम उठाये गये हैं. इसके तहत अगरबत्ती के फ्री ट्रेड को प्रतिबंधित करते हुए इसमें आयात शुल्क लगा दिया. वियतनाम से भारत में सालाना 600 करोड़ रुपये की अगरबत्ती स्टिक निर्यात की जाती है.
इसके अलावा चीन से भी अगरबत्ती स्टिक का आयात किया जाता है. आयात शुल्क लगने पर वियतनाम के घरेलू अगरबत्ती उद्योगों पर संकट आ गया है क्योंकि भारत सबसे बड़ा आयातक देश है. भारत के इस रुख को लेकर वियतनाम के व्यापारी विरोध कर रहे हैं. वहीं झारखंड के प्रतिनिधिमंडल उन उद्यमियों से मिलने वाले थे. ऐसें में विपरीत परिस्थिति उत्पन्न न हो, इसे देखते हुए भारतीय दूतावास ने फिलहाल दौरे की अनुमति नहीं दी और बाद में आने का सुझाव दिया.
इस बाबत पूछे जाने पर उद्योग सचिव के रविकुमार ने कहा कि वियतनाम के अगरबत्ती उद्योगों में कुछ परेशानी हो गयी है. जिसके कारण भारतीय दूतावास से वियतनाम दौरे को टालने का निर्देश दिया गया है और बाद में आने की बात कही गयी है. अगली तिथि बाद में तय की जायेगी.
