विधानसभा चुनाव 2019 : बढ़ती आबादी और पर्यावरण सबसे अहम सवाल

आधारभूत संरचना पर काफी काम हुए हैं, अब शिक्षा व स्वास्थ्य पर फोकस की जरूरत पद्मश्री अशोक भगत आदिवासी जनता कभी पेड़ नहीं काटती. वह पर्यावरण व धरती का माहौल भी नहीं बिगाड़ती. नदियों-तालाबों यहां तक कि जल का महत्व भी वह जानती है. आज के दौर में समाज के दो अहम मुद्दे हैं. जनसंख्या […]

आधारभूत संरचना पर काफी काम हुए हैं, अब शिक्षा व स्वास्थ्य पर फोकस की जरूरत
पद्मश्री अशोक भगत
आदिवासी जनता कभी पेड़ नहीं काटती. वह पर्यावरण व धरती का माहौल भी नहीं बिगाड़ती. नदियों-तालाबों यहां तक कि जल का महत्व भी वह जानती है. आज के दौर में समाज के दो अहम मुद्दे हैं. जनसंख्या अौर पर्यावरण. पर यह राजनीतिक पार्टियों के चुनावी मेनिफेस्टो (घोषणा पत्र) में शामिल नहीं रहते. या कहें इन पर जोर नहीं रहता, जबकि मानव जाति के लिए ये मुद्दे महत्वपूर्ण हैं.
झारखंड राज्य आदिवासी संस्कृति व यहां की प्रकृति से चल रहा है. जंगलों में हक और अधिकार मिलेगा, तभी राज्य की असली तरक्की होगी. मैं 38 साल से एक सोच पर समाज को खड़ा करने का प्रयास कर रहा हूं.
समाज सरकारों को प्रभावित करे, ऐसी नीतियों पर आधारित सोच विकसित की जानी चाहिए. सरकार लोगों को प्रभावित करने लगे, तो यह उल्टी व्यवस्था की ओर जनमानस को ढकेलेगा. हाल के कुछ वर्षों में सड़क,पानी व बिजली जैसे जरूरी मुद्दे हल हुए हैं. आधारभूत संरचना पर काफी काम हुआ है. अब शिक्षा व स्वास्थ्य पर ज्यादा फोकस की जरूरत है.
खास कर प्राथमिक शिक्षा में बड़ा गैप है. सरकार चाहे तो प्रखंड स्तर पर आदर्श आवासीय प्राथमिक विद्यालय खोल सकती है. निचले स्तर पर पंचायतों को अधिकार देने से एक बात यह हुई कि उनमें राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है. सरकार की खामियों और उनकी कमियों को सबको उजागर करना चाहिए. साथ ही हमें हर चीज के लिए सरकार या सरकारी सेवा पर निर्भरता की मानसिकता त्यागनी होगी. एक अकेला व्यक्ति काफी कुछ कर सकता है.
राजनीतिक दलों व नेताअों को पक्ष-विपक्ष जैसी भावना से ऊपर उठ झारखंड के हितों को लेकर काम करना होगा. जहां तक विकास की बात है, तो सबको लगना चाहिए कि यह मेरी सरकार है. उसी तरह लोगों का भी सरकार से जुड़ाव होना चाहिए.

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