रांची : झारखंड ऊर्जा विकास निगम के बिजली बोर्ड स्थित मुख्यालय में पिछले 10 वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है. इनकी जगह अब ऊर्जा विकास निगम कर्मचारियों को आउटसोर्स करेगा. यानी किसी एजेंसी को यह काम दिया जायेगा, जो सफाई आदि का काम काम कर सके.
इधर, कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2009 में जब आउटसोर्सिंग के तहत वे काम कर रहे थे, तब तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के एचआर निदेशक द्वारा आदेश जारी किया गया था कि आउटसोर्स करनेवाली कंपनी उनका शोषण कर रही है. अत: बिजली बोर्ड उन्हें सीधे अनुबंध पर 3500 रुपये मासिक की दर पर रख लिया. अब 10 वर्ष बीत जाने के बाद स्थायी करने की जगह उन्हें हटाया जा रहा है. यह सरासर गलत है. निगम द्वारा आउटसोर्स कर मैनपावर के लिए कंपनियों से आवेदन मंगाया गया है. मुख्यालय में ऐसे 22 कर्मचारी कार्यरत हैं. इसके अलावा भी बोर्ड के अनुषंगी कार्यालय में भी कई लोग कार्यरत हैं.
