सीएम के प्रधान सचिव के साथ पारा शिक्षकों की हुई वार्ता
रांची : राज्य के अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को एक और मौका मिलेगा. उन्हें मार्च 2020 तक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर दिया जायेगा. ऐसे में लगभग 4500 पारा शिक्षकों की सेवा फिलहाल बनी रहेगी. इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को जल्द प्रस्ताव भेजा जायेगा. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल के साथ मंगलवार को एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई. वार्ता में शिक्षकों की मुख्य मांगों पर सहमति बन गयी. श्री वर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पारा शिक्षकों की मांगों को लेकर काफी संवेदनशील हैं.
तय समय के अंदर पारा शिक्षकों की सभी मांगों पर कार्रवाई की जायेगी. वार्ता के बाद एकीकृत पारा शिक्षक संघ ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की. पारा शिक्षक अब 12 सितंबर को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में न्याय मांगने रांची नहीं आयेंगे. वार्ता में एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के संजय दूबे, हृषिकेश पाठक आदि शामिल थे.
मार्च 2020 तक होना होगा प्रशिक्षित
पूर्व में हटाने का पत्र जारी हुआ था
अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण पूरा करने को कहा गया था. 31 मार्च तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा स्वत: समाप्त होने की बात कही गयी थी. राज्य में लगभग 4500 ऐसे पारा शिक्षक हैं, जो अप्रशिक्षित है. भारत सरकार के निर्देश के अनुरूप झारखंड शिक्षा परियोजना ने ऐसे शिक्षकों को हटाने का पत्र जारी किया था.
नियमावली पर 17 को बैठक
वहीं, पारा शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली को लेकर गठित उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक 17 सितंबर को होगी. नियमावली को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. नियमावली के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में शिक्षकों को मिलने वाली सुविधा अौर उनकी नियुक्ति प्रक्रिया के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गयी है.
इधर, प्रदर्शन को लेकर अलर्ट
पारा शिक्षकों के धरना-प्रदर्शन को लेकर स्पेशल ब्रांच ने रांची एसएसपी सहित राज्य के सभी जिलों के एसपी को अलर्ट किया है. स्पेशल ब्रांच की ओर से पुलिस अधिकारियों को बताया गया है कि पूर्व में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में पारा शिक्षकों द्वारा विरोध-प्रदर्शन किया गया था. एहतियातन, पीएम के दौरे को लेकर एसपी अपने-अपने जिले के पारा शिक्षकों को चिह्नित कर उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखें.
