रांची : हम सबने बचपन से चांद को देखा है, बचपन में चंदा मामा के नाम पर मां से खूब लोरियां सुनी हैं, उसे दिखा-दिखाकर मां ने खाना भी खिलाया है. वही चंदा मामा युवावस्था में प्रियतम और प्रेयसी का रूप भी ले लेता है. किसी को चांद में प्रियतम का अक्स दिखता है तो किसी को चांदनी में अपनी प्रेमिका.
चांद के प्रति इसी लगाव के कारण हमारे देश में कहानी, कविताओं और बॉलीवुड की फिल्मों में भी चांद को केंद्र में रखकर कई रचनाएं गढ़ी गयी हैं. जो हमें खुशी भी देती हैं और मन को सुकून भी. चांदनी रात में कई प्रेमी जोड़े जीने-मरने की कसमें खाते हैं और चांद उनके प्रेम का गवाह बनता है.
https://www.youtube.com/watch?v=i0J4IE7DkuQ
चांद मानव जाति के लिए हमेशा से रहस्य रहा है, यही कारण है कि इसे हसरत से देखने वाले लोगों ने इसतक जाने की कोशिश की और सबसे पहले 1969 में नील आर्मस्ट्रांग ने चांद की धरती पर कदम रखा. आज भारत का चंद्रयान-2 चांद की धरती को चूमेगा और इसके रहस्यों से हमें रूबरू करायेगा. चांद को लेकर जो लगाव और प्रेम हमारे मन में उसकी बानगी देखनी हो तो पढ़ें रामधारी दिनकर की यह कविता-
हार कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,
‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।
सनसन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुर्ता ही कोई भाड़े का।’’
बच्चे की सुन बात कहा माता ने, ‘‘अरे सलोने!
कुशल करें भगवान, लगें मत तुझको जादू-टोने।
जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हूँ,
एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है, और किसी दिन छोटा।
घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।
अब तू ही ये बता, नाप तेरा किस रोज़ लिवाएँ,
सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आए?’’
वहीं कई बार चांद प्रेमिका को दुश्मन की तरह भी लगता है जो अपनी रौशनी से प्रेमी के साथ उसके मिलन में बाधा बन रहा है तब प्रेमिका उसे कुछ इस तर बद्दुआएं भी देती हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=IDZbnsU3lP0
बॉलीवुड में चांद को हमेशा से हीरोइन की खूबसूरती के पैमाने के रूप में देखा जाता है और यही कारण है कि की बार उसकी खूबसूरती का वर्णन भी उसी तरह से किया जाता है.
