रांची : ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अपने मूल कार्य से भटक कर दूसरे विभागों के कार्यों में लगे हुए हैं. उन्हें मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के पुलों का काम करना है, लेकिन कई जगहों पर वे जिला स्तर की योजनाअों को मूर्त रूप देने में लगे हैं.
अभी हजारीबाग जिले में 55 करोड़ से अधिक की योजनाअों का टेंडर विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने निकाला है. अब यहां के इंजीनियर पुलों के काम से ज्यादा इन योजनाअों पर लगे रहेंगे. विभागीय सचिव आराधना पटनायक की रोक के बावजूद इंजीनियर बिना अनुमति के दूसरे कामों में लगे हुए हैं. इसका असर हो रहा है कि वे पुल योजनाअों पर कम ध्यान दे रहे हैं. पुलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. इसका नतीजा है कि राज्य भर में बारिश से पुल धंस रहे हैं.श्रीमती पटनायक ने इस बाबत मुख्य अभियंता, सारे अधीक्षण व कार्यपालक अभियंता को पत्र भी लिखा था.
इसमें स्पष्ट किया गया था कि बिना अनुमति वे ग्रामीण विकास विभाग के अलावा जिला स्तर पर कोई भी योजना नहीं करेंगे. उन्होंने लिखा था कि जिलों की योजनाअों में इंजीनियरों के ज्यादा रुचि लेने से पुल का सुपरविजन भी ठीक से नहीं हो रहा है. ऐसे में उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. यहां तक कि डीपीआर का काम भी प्रभावित है.
कोर्ट के अवमानना में भी बनना पड़ा प्रतिवादी
सचिव ने लिखा था कि विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा सिमडेगा में कल्याण विभाग की योजनाअों पर काम किया गया था. बाद में संवेदक आवंटन के मामले को लेकर हाइकोर्ट चला गया और यहां ग्रामीण विकास विभाग को प्रतिवादी बना दिया गया. विभाग ने न तो उक्त योजना की स्वीकृति दी थी और न ही उसका आवंटन निर्गत किया था, फिर भी विभाग प्रतिवादी बन गया.
