तीन हजार एआइ सेंटर खोले जायेंगे

रांची : राज्य में फिर तीन हजार कृत्रिम प्रजनन (एआइ) केंद्र खोले जायेंगे. गव्य विकास विभाग इसकी तैयारी कर रहा है. जबकि झारखंड स्टेट इंप्लीमेंटिंग एजेंसी (जेएसआइए) ने दो हजार केंद्र चलाने का प्रस्ताव दिया है. इसमें करीब 900 युवकों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण दे दिया गया है. उल्लेखनीय है कि जेएसअाइए भारत सरकार […]

रांची : राज्य में फिर तीन हजार कृत्रिम प्रजनन (एआइ) केंद्र खोले जायेंगे. गव्य विकास विभाग इसकी तैयारी कर रहा है. जबकि झारखंड स्टेट इंप्लीमेंटिंग एजेंसी (जेएसआइए) ने दो हजार केंद्र चलाने का प्रस्ताव दिया है.

इसमें करीब 900 युवकों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण दे दिया गया है. उल्लेखनीय है कि जेएसअाइए भारत सरकार के सहयोग से राज्य में चलायी जा रही सरकारी संस्था है. इसके बावजूद इस संस्था के प्रस्ताव को खारिज करते हुए टेंडर के माध्यम से दूसरी एजेंसियों को काम देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है.
गौरतलब है कि राज्य में अभी दो संस्था बाएफ और जेके ट्रस्ट, एआइ का काम कर रही है. जेके ट्रस्ट राज्य सरकार की संस्था जेएसआइए के सहयोग से यह काम कर रही है. भारतीय एग्रो इंडियन फाउंडेशन (बाएफ) पूर्व में 1010 केंद्रों पर एआइ का काम कर रही थी. वर्तमान में 150 संस्था को छोड़ शेष स्थानों पर काम बंद है.
नॉमिनेशन पर मिला था काम
भारतीय एग्रो इंडियन फाउंडेशन (बाएफ ) को पूर्व पशुपालन सचिव राजबाला वर्मा ने 2006 में नॉमिनेशन के आधार पर काम दिया था. शुरू में 55 सेंटर खोले गये थे. धीरे-धीरे संस्था को पूरे राज्य में 1010 सेंटर खोलने की अनुमति दी गयी. संस्था कृत्रिम गर्भाधान के अतिरिक्त चारा और दवा वितरण का भी काम करती थी.
सेंटर खोलने के साथ एमओयू हुआ था कि संस्था पांच साल में यहां के युवकों को प्रशिक्षित कर देगी. इसके बाद सरकार अनुदान देना बंद कर देगी. इसके बाद खोले गये सेंटरों का संचालन प्रशिक्षित युवक बाएफ का फेडरेशन बनाकर करेंगे. 2018 में संस्था का सरकार के साथ एग्रीमेंट समाप्त हो गया. इसके बाद बाएफ ने कई केंद्रों को बंद कर दिया.
पांच-छह को धरना देंगे बाएफ के कर्मचारी
झारखंड बाएफ इंस्टीट्यूट सस्टेनेबल लाइवलीहुड डेवलपमेंट कर्मचारी संघ पांच और छह जुलाई को गव्य निदेशालय के समक्ष धरना देगा. राज्यपाल को दिये ज्ञापन में कर्मियों ने यह जानकारी दी है. सचिव चंदन कुमार ने बताया कि 13 वर्षों तक काम लेने के बाद बाएफ ने कर्मचारियों को काम से हटा दिया है. पूर्व में 1800 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक मानदेय दिया जाता था. सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो धरना दिया जायेगा.
सरकार ने 2016-17 का करीब 16 करोड़ रुपये नहीं दिया है. अभी करीब 250 केंद्रों का पैसा भी बचा हुआ है. काम करने के बाद भी पैसा नहीं मिलने के कारण युवकों को परेशानी हुई है. हम सरकार की शर्तों के साथ काम कर रहे थे. हमलोगों के काम का नैबकॉस ने मूल्यांकन किया था. इसमें काफी अच्छा परिणाम आया था. इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया. संजीव सिन्हा, स्टेट नोडल पदाधिकारी, बाएफ

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