रिम्स का पैसा फंसा : निदेशक की सख्ती के बाद मशीनों की िजम्मेदारी लेने से कतरा रहे विभागाध्यक्ष
रांची : रिम्स की मेडिसिन आइसीयू के लिए इस साल जनवरी में मंगायी गयी 36 पेंडेंट मशीनें आपूर्तिकर्ता एजेंसी को लौटाने की तैयारी की जा रही है. जर्मनी में बनी इस एक मशीन की कीमत 5,56,000 रुपये के आसपास है. यानी 36 मशीनों के लिए रिम्स प्रबंधन ने दो करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की है.
खास बात यह है कि वर्ष 2018 में मेडिसिन विभाग ने ही रिम्स प्रबंधन से इन पेंडेंट मशीनों को खरीदने का आग्रह किया था. अब जब ये मशीनें अस्पताल प्रबंधन को मिल चुकी हैं, तो विभाग ही यह कह रहा है कि उसे इनकी जरूरत नहीं है.
इधर, रिम्स प्रबंधन का कहना है कि वह इन मशीन को वापस लेने के लिए आपूर्तिकर्ता एजेंसी को पत्र भेजेगा. मेडिसिन के विभागाध्यक्ष द्वारा भेजे गये पत्र के आधार पर एजेंसी से आग्रह किया जायेगा कि चूंकि इन मशीनों की उपयोगिता नहीं जान पड़ती, इसलिए आप मशीन को वापस लेने की प्रक्रिया बतायें.
अन्य विभाग भी भेज रहे मशीनें लौटाने का पत्र : रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने मशीनों की खरीद और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्षों को सौंप दी है. कहा है कि सिर्फ मशीन मंगाने से नहीं होगा, उसका उपयोग और रखरखाव भी बेहतर होना चाहिए. निदेशक के इस फरमान से विभागाध्यक्ष नाराज हैं. कई विभागाध्यक्ष तो पद छोड़ने तक का मन बना चुके हैं. उनका तर्क है कि वे मरीज का इलाज करें या मशीनों की देखभाल करें.
डेढ़ साल पहले रिम्स प्रबंधन ने आइसीसीयू को अत्याधुनिक बनाने के लिए मशीन की जरूरतें बताने को कहा था. 36 बेड की आइसीसीयू के लिए 36 पेंडेंट मशीनें इंडेट की गयी थीं. आइसीयू अब तक दुरुस्त नहीं हो पायी है. मशीन रखने की जगह नहीं है. उपयोगिता नहीं देखते हुए फिलहाल मशीन लेने से इंकार किया गया है.
डॉ जेके मित्रा, विभागाध्यक्ष मेडिसिन
मेडिसिन विभागाध्यक्ष ने मशीन नहीं लेने का आग्रह किया है. हम मशीन उपलब्ध करानेवाली एजेंसी को पत्र लिखकर मशीन वापस ले जाने का आग्रह करेंगे. देखते हैं कि एजेंसी इस आग्रह को स्वीकार करती है या नहीं.
डाॅ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स
हाउस सर्जन की सीटें कम होने पर निदेशक से मिले जूनियर डॉक्टर
रांची : रिम्स में हाउस सर्जन की सीटें कम होने पर जूनियर डॉक्टरों में आक्रोश है. जूनियर डॉक्टर मंगलवार को इसी के विरोध में रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह से मिले. उनका कहना था कि रिम्स प्रबंधन सीटों को कम कर रहा है. पहले से ही मरीजों की तुलना में हाउस सर्जन की 75 सीटें हैं, लेकिन इसे 57 करने का फैसला लिया गया है.
यह विद्यार्थियों के हित में नहीं है. विद्यार्थियों का कहना था कि शासी परिषद की बैठक में सीटों को कम व अधिक करने का निर्णय होता है, लेकिन प्रबंधन अपने हिसाब से सीटों को कम कर रहा है. हड्डी, सर्जरी, इएनटी व इमरजेंसी में हाउस सर्जन नहीं हैं. इमरजेंसी में पहले चार हाउस सर्जन थे. इस पर निदेशक ने कहा कि विभागाध्यक्ष से लिखवाकर मांगा जायेगा कि कितने हाउस सर्जन की जरूरत है. उसके बाद ही सीटों को बढ़ाने या घटाने पर विचार किया जायेगा.
