रांची विश्वविद्यालय : 180 दिन की पढ़ाई जरूरी पर कक्षाएं मात्र 130 दिन

विश्वविद्यालय के कैलेंडर के अनुसार वर्ष में सौ दिन का अवकाश, रविवार की छुट्टी अलग से रांची : राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, आधे पद रिक्त हैं. जो शिक्षक हैं, वह भी प्रावधान के अनुरूप कक्षा नहीं ले पाते हैं. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश के अनुरूप वर्ष में 180 दिन […]

विश्वविद्यालय के कैलेंडर के अनुसार वर्ष में सौ दिन का अवकाश, रविवार की छुट्टी अलग से
रांची : राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, आधे पद रिक्त हैं. जो शिक्षक हैं, वह भी प्रावधान के अनुरूप कक्षा नहीं ले पाते हैं. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश के अनुरूप वर्ष में 180 दिन की पढ़ाई अनिवार्य है. पर राज्य के विश्वविद्यालयों में 180 दिन पढ़ाई नहीं हो पाती है. ऐसे में विद्यार्थियों को बिना पाठ्यक्रम पूरा हुए परीक्षा में शामिल होना पड़ता है. विश्वविद्यालय के कैलेंडर के अनुसार वर्ष में 100 दिन तक अवकाश रहता है और रविवार की छुट्टी अलग से.
वर्ष 2019 को ही ले लें तो विवि में 96 दिन का अवकाश है और 52 रविवार हैं. विवि के घोषित अवकाश में से पांच रविवार अवकाश में आते हैं. ऐसे में 96 अवकाश और 47 रविवार को मिला कर वर्ष में 139 दिन छुट्टी है. ऐसे में वर्ष में 365 दिन में से 226 दिन ही कक्षा के लिए बचे. यूजीसी के मापदंड के अनुरूप वर्ष में 180 दिन पढ़ाई अनिवार्य है. ऐसे में अगर अवकाश के बाद भी बचे हुए 226 दिन नियमित रूप से कक्षा संचालित हो तो वर्ष में 180 दिन की पढ़ाई हो जायेगी, पर विवि में ऐसा होता नहीं है.
च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू होने के बाद विश्वविद्यालय में परीक्षा की संख्या दोगुनी हो गयी. स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षा को ही ले लिया जाये तो एक वर्ष में दस सेमेस्टर की परीक्षाएं होती है.
स्नातक में एक साथ तीन सत्र और स्नातकोत्तर में एक साथ दो सत्र के विद्यार्थी नामांकित रहते हैं. सीबीसीएस में एक वर्ष में दो सेमेस्टर की परीक्षा लेने का प्रावधान है. ऐसे में प्रति वर्ष स्नातक के छह व स्नातकोत्तर के चार सेमेस्टर की परीक्षा व रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है. अगर एक सेमेस्टर की परीक्षा लेने व उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में दस दिन की भी पढ़ाई बाधित होती है तो विवि में वर्ष में लगभग सौ दिन परीक्षा लेने व रिजल्ट जारी करने में निकल जाते हैं.
अवकाश के 139 दिन व परीक्षा व रिजल्ट जारी करने के सौ दिन को मिला दिया जाये तो वर्ष में लगभग 239 दिन पठन-पाठन बाधित रहता है. वर्ष में 180 दिन के बदले 120 से 130 दिन कक्षा का संचालन संभव हो पाता है. विद्यार्थी बिना पाठ्यक्रम पूरा किये परीक्षा देते हैं.
झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने भी कराया था सर्वे
यूजीसी ने डिग्री कॉलेज से इंटर की पढ़ाई अलग करने का निर्देश दिया है. इसके बाद कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई हो रही है. झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने डिग्री कॉलेजों में कक्षा संचालन को लेकर सर्वे कराया था.
जैक द्वारा कराये गये सर्वे में यह बात सामने आयी थी कि डिग्री कॉलेज में 120 दिन से अधिक की पढ़ाई नहीं होती है. जिन डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई साथ होती है, वहां इंटर में तय प्रावधान के अनुरूप कक्षाओं का संचालन नहीं होता. इंटर का पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए वर्ष में 220 दिन की पढ़ाई अनिवार्य है, पर कॉलेजों में 220 दिन की पढ़ाई नहीं होती.
पढ़ाई नहीं, परीक्षा व रिजल्ट है प्राथमिकता
विवि में पठन-पाठन नहीं बल्कि परीक्षा लेने व रिजल्ट देना ही पहली प्राथमिकता है. रांची विवि में पीजी का सत्र विलंब से चल रहा था. यहां तीन माह के अंदर दो सेमेस्टर की परीक्षाएं लेकर रिजल्ट जारी कर दिया गया.
अप्रैल में पीजी के सेमेस्टर तीन की परीक्षा हुई व 30 जून तक सेमेस्टर चार का रिजल्ट भी जारी कर दिया गया. पीजी का सत्र दो वर्ष का होता है. छह माह पर एक सत्र की परीक्षा लेने का प्रावधान है. विवि ने अगस्त 2017 से मार्च 2019 तक मात्र दो सेमेस्टर की परीक्षा ली. इसके बाद के तीन माह में शेष दो सेमेस्टर की परीक्षा व रिजल्ट देने की प्रक्रिया पूरी की. विवि स्तर पर कभी इस बात की समीक्षा नहीं की गयी कि पाठ्यक्रम भी पूरा हुआ या नहीं. इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगत रहे हैं.
साल में 150 दिन से अधिक होती है परीक्षा
विश्वविद्यालय में स्नातक व पीजी के अलावा बीएड, मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ समेत अन्य परीक्षाएं होती हैं. रांची विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ राजेश कुमार ने बताया कि विवि द्वारा वर्ष में लगभग 150 दिन परीक्षा ली जाती है.
विनोद बिहारी महतो विवि के परीक्षा नियंत्रक डाॅ सत्यजीत कुमार ने बताया कि सीबीसीएस सिस्टम से परीक्षा का लोड बढ़ गया है. हालांकि विवि की ओर से यह प्रयास किया जाता है कि स्नातक को छोड़ कर बाकी परीक्षा एक ही पाली में ली जाये, ताकि पठन-पाठन कम से कम प्रभावित हो. इसके अलावा शिक्षकों को कक्षा के बाद कॉपी जांचने के लिए कहा जाता है. परीक्षा व मूल्यांकन के दौरान कक्षाएं बाधित होती है.

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