राष्ट्रीय जन आंदोलन समन्वय का दो दिवसीय प्रथम राज्य अधिवेशन शुरू
रांची : मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडेय ने कहा कि पिछले 60-70 सालों में दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक व महिला अधिकारों के क्षेत्र में कुछ प्रगति हुई थी़
मनरेगा व आरटीआइ जैसे कई अधिकार मिले थे, पर अब देश में चार लोगों की सरकार चल रही है़ इसमें मोदी व शाह सामने हैं और अडाणी व अंबानी पीछे है़ं इसीलिए अब देश में गरीबों की बात नहीं होती. सरकार कुतर्कों के आधार पर गरीबों के अधिकारों को खारिज कर रही है़
हमारे-आपके मुद्दे गौण हो गये है़ं यह असंवेदनशील सरकार है और यह दौर काफी कठिन है़ ऐसे समय में हमें मुद्दों की लड़ाई में किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं है, पर इन्हें जिंदा रखने की जरूरत है़ समय जरूर बदलता है़ वे बगईचा, नामकुम में आयोजित राष्ट्रीय जन आंदोलन समन्वय (एनएपीएम) के प्रथम राज्य अधिवेशन में ‘झारखंड में संवैधानिक अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा की स्थिति’ विषय पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे़
आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा है संकट : उन्होंने कहा कि पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात हो रही है, पर यह सवाल नहीं पूछा जा रहा है कि इसमें फायदा किसको होगा? इसका फायदा अमीरों को ही होगा़ आदिवासी क्षेत्रों में संकट कुछ ज्यादा है़ यहां अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले नेतृत्व की कमी दिखती है. विधानसभा, लोकसभा या समाज में उनकी बात उठानेवाला कोई प्रभावशाली नेतृत्व नहीं दिखता़
आनुपातिक चुनाव प्रणाली की हो बात : समाजवादी जन परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष चंद्रभूषण चौधरी ने कहा कि हमें आनुपातिक चुनाव प्रणाली के लिए अभियान चलाना होगा़ दुनिया के 83 देशों में इस आधार पर चुनाव होते है़ं
यूनाइटेड मिल्ली फोरम के अफजल अनीस ने कहा कि माॅब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश झारखंड में भी लागू किया जाये़ प्रो ज्यां द्रेज ने कहा कि सांप्रदायिकता को सरकार का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए़ एकल नारी सशक्ति संगठन की सोनाली ने भी अपने विचार रखे. मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता बलराम, एनएपीएम के राजेंद्र रवि, बगईचा के फादर पीएम टोनी, आदिवासी वीमेंस नेटवर्क की एलिना होरो, आशीष रंजन, महेंद्र यादव आदि मौजूद थे.
