बिजली की स्थिति का मुख्य कारण वितरण व ट्रांसमिशन
29 ऐसी यूनिट हैं, जहां से राशि की वसूली नहीं हो पाती
2022 तक घर, पानी व गैस ग्रिड की व्यवस्था की जायेगी
रांची : राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा कि रांची में सीवरेज-ड्रेनेज मामले पर कई बार सरकार का ध्यान खींचने का काम किया. मैंने स्पष्ट तौर पर अपनी बातें भी रखीं. मुझे लगता है कि यहां सीवरेज-ड्रेनेज के लिए क्वालिटी ऑफ इंजीनियरिंग की कमी है. इस वजह से सीवरेज-ड्रेनेज एक चुनौती बन चुका है.
उन्होंने कहा कि कई ऐसे विभाग हैं, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर काम हुए हैं. जहां तक बिजली व्यवस्था की बात है, तो यह समस्या उत्पादन की उपलब्धता के कारण नहीं है. इसकी मुख्य वजह बिजली वितरण व ट्रांसमिशन है.
लैंड डिजिटाइजेशन के बारे में उन्होंने कहा कि प्रक्रिया भले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन डिजिटाइजेशन सही तरीके से नहीं हो पाया. इस वजह से आज जमीन के इतने मामले उभर कर सामने आ रहे हैं. सांसद श्री पोद्दार शनिवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि 2200 से 2500 मेगावाट बिजली बगल के राज्यों से आती हैं. समस्या राशि की है. आज भी 29 ऐसी यूनिट हैं, जहां से राशि की वसूली नहीं हो पाती है.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सारे अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब तक जितनी भी घोषणाएं हुई हैं व सर्वे का काम हुआ, इससे संबंधित पूरी जानकारी एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध करायें. ताकि, इस पर विस्तार से बात की जा सके. उन्होंने कहा वर्ष 2022 तक पानी, घर व गैस ग्रिड की व्यवस्था की जायेगी.
