नयी दिल्ली : देश में आदिवासियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने 284 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी है. लेकिन इसमें से 65 विद्यालय अभी काम नहीं कर रहे हैं और ऐसे स्कूलों की संख्या झारखंड में 16 है.
शून्यकाल में चतरा के भाजपा सांसद सुनील कुमार सिंह ने सवाल उठाते हुए सरकार से जानना चाहा कि चतरा, पलामू और लातेहार में मंजूरी के बावजूद ऐसे स्कूल अभी तक क्यों नहीं खुल पाये हैं. साथ ही उन्होंने घटवार, गंजू, भोक्ता और खतौरी जातियों को जनजाति समूह में शामिल करने को लेकर सवाल पूछा.
इसका जवाब देते हुए आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि लातेहार में एकलव्य विद्यालय का काम प्रगति पर है. इसके अलावा लातेहार के ही महुआटांड, गारु और बरवाडीह में विद्यालय बनाने की योजना प्रस्तावित है. विद्यालय के निर्माण के लिए राज्यों को केंद्र पैसा आवंटित करती है. केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि किसी जाति को जनजाति में शामिल करने की संवैधानिक प्रक्रिया है.
इसके लिए राज्य सरकार प्रतिवेदन करती है और फिर यह रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के पास जाता है. आरजीआइ की सिफारिश के बाद मंत्रालय इसे राष्ट्रीय जनजाति आयोग को भेजता है. कमीशन की सिफारिश फिर कैबिनेट के पास भेजा जाता है और अंतिम फैसला लिया जाता है.
शब्दों में हेरफेर होने पर हिचकते हैं अधिकारी
मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि मौजूदा समय में जाति प्रमाण पत्र जारी करने में दिक्कतें आ रही हैं. पहले अधिकारियों को जातियों के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी होती थी और जाति प्रमाण पत्र जारी करने में दिक्कत नहीं होती थी.
चूंकि अब राज्य में लैंड रिकार्ड का डाटा बन रहा है और शब्दों में हेरफेर होने पर अधिकारी जाति प्रमाण पत्र बनाने से हिचकते हैं. सरकार सभी राज्यों से सूचना लेकर इसमें संशोधन करने का काम कर रही है और जल्द ही समस्या का समाधान हो जायेगा.
