रांची : पश्चिम सिंहभूम, लातेहार व गढ़वा सहित झारखंड के कई अन्य जिले मलेरिया से प्रभावित माने जाते हैं. भारत सरकार ने 2030 तक देश से मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस आलोक में मलेरिया की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार राज्यों को अौषधि युक्त (मेडिकेटेड) मच्छरदानी देती है.
केंद्र सरकार से झुग्गी-झोपड़ी के लिए 13 लाख मच्छरदानी की मांग की गयी
रांची : पश्चिम सिंहभूम, लातेहार व गढ़वा सहित झारखंड के कई अन्य जिले मलेरिया से प्रभावित माने जाते हैं. भारत सरकार ने 2030 तक देश से मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस आलोक में मलेरिया की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार राज्यों को अौषधि युक्त (मेडिकेटेड) मच्छरदानी देती है. राज्य के मलेरिया नियंत्रण […]

राज्य के मलेरिया नियंत्रण कोषांग ने केंद्र से झारखंड के शहरी झुग्गी-झोपड़ियों के लिए करीब 13 लाख मच्छरदानी की मांग की है. इससे पहले वर्ष 2016 में केंद्र ने झारखंड को 16 लाख मच्छरदानी दी थी. इन पुराने मच्छरदानियों के बदले (रीप्लेसमेंट) भी 17.60 लाख (10 फीसदी अतिरिक्त) मच्छरदानियां मांगी गयी थी, जिसे केंद्र ने आवंटित कर दिया है. हालांकि इनकी आपूर्ति अभी शुरू नहीं हुई है. मलेरिया से अति प्रभावित जिलों में 20 से 22 जून तक मास फीवर सर्वे होगा.
इस दौरान बुखार से पीड़ित व्यक्ति की त्वरित जांच कर उसे इलाज मुहैया करायी जायेगी. अभियान के दौरान ग्रामीणों को मच्छरदानी के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जायेगा तथा मच्छर से होनेवाली बीमारियों से बचाव की जानकारी भी दी जायेगी. इधर, मलेरिया प्रभावित ग्रामीण इलाके में 15 मई से 30 जून तक कीटनाशक का भी छिड़काव होगा, जिससे करीब 55 लाख की आबादी को कवर किया जाना है.
मलेरिया की जांच बढ़ी, केस घटा : कोषांग के ताजा आंकड़े के अनुसार वर्ष 2018 (जनवरी से अप्रैल) की तुलना में वर्ष 2018 (जनवरी से अप्रैल) में प्रति हजार आबादी में मलेरिया के केस घटे हैं. 2018 में जहां यह प्रति हजार 0.41 व्यक्ति था, वहीं 2019 में यह 0.24 प्रति हजार है. 2018 में उस दौरान कुल 15994 लोगों का ब्लड सैंपल पॉजिटिव मिला था. वहीं इस वर्ष अब तक 9312 लोग पॉजिटिव पाये गये हैं.