एसएचजी के जरिये गोला से शुरू होगा पोषाहार प्रोजेक्ट

रांची : महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सहायता से पोषाहार उत्पादन व वितरण का काम रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड से शुरू हो सकता है. पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत यह पायलट प्रोजेक्ट होगा. समाज कल्याण विभाग ने सैद्धांतिक रूप से यह निर्णय लिया है कि यदि गोला का प्रयोग सफल रहा, तो इसके […]

रांची : महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सहायता से पोषाहार उत्पादन व वितरण का काम रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड से शुरू हो सकता है. पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत यह पायलट प्रोजेक्ट होगा. समाज कल्याण विभाग ने सैद्धांतिक रूप से यह निर्णय लिया है कि यदि गोला का प्रयोग सफल रहा, तो इसके अनुभवों के आधार पर राज्य के दूसरे जिलों में भी पोषाहार निर्माण व वितरण का काम एसएचजी को सौंपा जायेगा.

अभी राज्य भर में पोषाहार (रेडी टू इट) उत्पादन व वितरण का काम मेसर्स इंटरलिंक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली को निविदा के माध्यम से दिया गया है. इधर, कंपनी के साथ सरकार का करार अगस्त 2019 में समाप्त हो रहा है. इससे पहले पोषाहार उत्पादन व वितरण के लिए निविदा की प्रक्रिया जून के पहले सप्ताह में शुरू हो सकती है. गौरतलब है कि समाज कल्याण विभाग बच्चों, किशोरियों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषाहार उपलब्ध कराता है.
आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये संचालित यह योजना, पूरक पोषाहार कार्यक्रम (सप्लीमेंट्री न्यूट्रीशन प्रोग्राम या एसएनपी) कहलाती है, जिसके तहत राज्य भर के 38,432 आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब 28 लाख बच्चों (छह माह से तीन वर्ष तक) तथा गर्भवती व धात्री महिलाओं को पैकेट बंद रेडी टू इट पोषाहार (पंजीरी व उपमा) आपूर्ति की जा रही है. इसका मकसद बच्चों व महिलाओं में व्याप्त कुपोषण को दूर करना है.
फैसला
  • समाज कल्याण विभाग पोषाहार उत्पादन व वितरण का काम शुरू करेगा
  • गोला का प्रयोग सफल रहा, तो दूसरे जिलों में भी होगा लागू
  • इसका मकसद बच्चों व महिलाओं में व्याप्त कुपोषण को दूर करना है
नयी रेसिपी तैयार की जायेगी
बच्चों सहित गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए अभी बन रहे पोषाहार में बदलाव होगा. समाज कल्याण विभाग ने भारत सरकार की संस्था फूड एंड न्यूट्रीशन बोर्ड, कोलकाता से बच्चों व महिलाओं के लिए नयी रेसिपी (पकवान) का फॉर्मूला तैयार करने का आग्रह किया है. बोर्ड बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए तीन-तीन रेसिपी का सुझाव देगा. विचार-विमर्श के बाद बाद राज्य सरकार इनमें से किसी एक-एक का चयन करेगी, जिसके आधार पोषाहार का उत्पादन होगा.

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