फांसी की सजा सुनानेवाले जज की सुरक्षा काे खतरा

रांची : एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड में नक्सली प्रवीर दा और सनातन बास्की को सजा सुनानेवाले जस्टिस तौफिकुल हसन और उनके परिवार पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरा उत्पन्न हो गया है. इसलिए पुलिस मुख्यालय ने दुमका एसपी को जस्टिस और कटिहार एसपी को जज के परिवार को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है. दोनों […]

रांची : एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड में नक्सली प्रवीर दा और सनातन बास्की को सजा सुनानेवाले जस्टिस तौफिकुल हसन और उनके परिवार पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरा उत्पन्न हो गया है. इसलिए पुलिस मुख्यालय ने दुमका एसपी को जस्टिस और कटिहार एसपी को जज के परिवार को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है.

दोनों एसपी को इससे संबंधित पत्र विशेष शाखा की ओर से भेज दिया गया है. पुलिस के अनुसार नक्सलियों को सजा सुनाने के बाद जस्टिस ने स्वयं और परिजनों पर खतरा महसूस करते हुए सुरक्षा मांगी थी.
मामले में हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अंबुज नाथ ने डीजीपी को पत्र भेजा था. सुरक्षा देने से संबंधित अनुरोध पत्र मिलने के बाद समीक्षा की गयी, जिसमें जज और उनके परिजनों की सुरक्षा सुदृढ़ करने की आवश्यकता पायी गयी. जस्टिस के परिजन कटिहार जिले में हते हैं. इसलिए वहां सुरक्षा देने का निर्देश कटिहार एसपी को दिया गया है़
उल्लेखनीय है कि अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में सितंबर 2018 में प्रवीर दा और सनातन बास्की को सजा सुनायी गयी थी. यह फैसला दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफिकुल हसन ने दिया था. फैसले में कोर्ट ने कहा था कि जो घटना घटी, वह जघन्य अपराध था.
एक आइपीएस की हत्या हुई है. अगर इन्हें छोड़ दिया गया तो फिर से पुलिस पदाधिकारी, आम व्यक्ति की हत्या करेंगे. बाद में नक्सलियों ने सजा सुनाये जाने के विरोध में पोस्टरबाजी कर 16 व 17 अक्तूबर को संताल परगना बंद बुलाया गया था.

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