रांची : भागे हुए नक्सलियों को सजा दिलाने के लिए एसओपी तैयार

रांची : राज्य के फरार नक्सलियों, उग्रवादियों और अपराधियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना को लेकर दर्ज केस में आरोपियों को सजा दिलाने और केस के बेहतर अनुसंधान के लिए पुलिस मुख्यालय ने एसओपी (स्टैंटर्ड ऑपरेटिंग प्राेसीजर) तैयार किया है. पुलिस मुख्यालय को इस बात की जानकारी मिली है कि इश्तेहार और कुर्की की कार्रवाई […]

रांची : राज्य के फरार नक्सलियों, उग्रवादियों और अपराधियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना को लेकर दर्ज केस में आरोपियों को सजा दिलाने और केस के बेहतर अनुसंधान के लिए पुलिस मुख्यालय ने एसओपी (स्टैंटर्ड ऑपरेटिंग प्राेसीजर) तैयार किया है.
पुलिस मुख्यालय को इस बात की जानकारी मिली है कि इश्तेहार और कुर्की की कार्रवाई होने के बाद भी आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण नहीं किया. पुलिस मुख्यालय को यह भी जानकारी मिली है कि कई खूंखार उग्रवादी किसी केस में संलिप्त पाये जाने के बाद फरार हो जा रहे हैं, जिसके कारण संबंधित केस के अनुसंधान के दौरान उनके खिलाफ साक्ष्य संकलन में कठिनाई का सामना करना पड़ता है.
संबंधित आरोपी बाहर रहते हुए डराते और धमकाते भी हैं. ऐसे में उन्हें केस में सजा दिलाना कठिन हो जाता है. ऐसा न हो इसके लिए संबंधित अपराधी, उग्रवादी और अपराधी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना को लेकर केस दर्ज किया जा रहा है.
एसओपी के तहत दिये गये प्रमुख निर्देश
न्यायालय की अवमानना के तहत केस कर साक्ष्य संकलित करने के बाद संबंधित आरोपी को सरेंडर कराने के लिए न्यायालय से वारंट और इश्तेहार प्राप्त करें.
इश्तेहार तामिला की प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी करायी जाये, ताकि इससे संबंधित प्रमाण समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सके.
नक्सली के फरार होने पर उसका दस्ता जिस क्षेत्र में भ्रमणशील हो, उस क्षेत्र में भी इश्तेहार निर्गत होने की सूचना दी जाये.
इश्तेहार के बावजूद सरेंडर नहीं करने पर 30 दिनों के बाद कुर्की की कार्रवाई कर न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया जाये.
फरार नक्सलियों और उग्रवादियों के खिलाफ उसके परिवार और उसे जाननेवालों से भी साक्ष्य संकलित करने का प्रयास किया जाये.

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