मानव तस्करी फर्जी केस में सवा साल बाद भी रेल एसपी, डीएसपी ने नहीं दिया जवाब

रांची : मानव तस्करी को लेकर रांची रेल थाना में दर्ज केस, जिसे रेल आइजी सुमन गुप्ता ने सही नहीं पाया है, उस केस को अपनी सुपरविजन रिपोर्ट में तत्कालीन रेल डीएसपी क्रिस्टोफर केरकेट्टा व तत्कालीन रेल एसपी अंशुमन ने सही बताया था. लिहाजा, मामले में आइजी ने दोनों अफसरों को स्थिति स्पष्ट करने का […]

रांची : मानव तस्करी को लेकर रांची रेल थाना में दर्ज केस, जिसे रेल आइजी सुमन गुप्ता ने सही नहीं पाया है, उस केस को अपनी सुपरविजन रिपोर्ट में तत्कालीन रेल डीएसपी क्रिस्टोफर केरकेट्टा व तत्कालीन रेल एसपी अंशुमन ने सही बताया था.

लिहाजा, मामले में आइजी ने दोनों अफसरों को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था. लेकिन सवा साल बाद भी दोनों अफसरों ने जवाब नहीं दिया. इसलिए आइजी ने मामले में दोनों अफसरों के खिलाफ डीजीपी से कार्रवाई की अनुशंसा की है.
रेल आइजी ने रिपोर्ट में लिखा है कि समीक्षा के दौरान पाया गया कि केस का सुपरविजन करनेवाले तत्कालीन रेल डीएसपी क्रिस्टोफर केरकेट्टा और तत्कालीन रेल एसपी जमशेदपुर अंशुमन कुमार ने साक्ष्यों की गहन समीक्षा किये बिना केस को सत्य करार दिया था. दोनों अफसरों ने मामले में तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को नजरअंदाज किया. जिसके कारण भी निर्दोष व्यक्ति कई माह तक जेल में रहे.
वहीं रेल थाना में मानव तस्करी को लेकर झूठा केस दर्ज कराने के आरोप में शिकायतकर्ता सीता स्वांसी के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश आइजी ने रेल एसपी को दिया है. इसके साथ ही सीता स्वांसी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन प्रस्ताव समर्पित करने का निर्देश भी दिया गया है.
रेल आइजी द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार मामले में अनुसंधानक की झूठी केस डायरी के आधार पर मामले में कोर्ट ने संज्ञान ले लिया था. लेकिन बाद में डिस्चार्ज पीटिशन दायर किया गया. सुनवाई के बाद मामले में कोर्ट ने जिलानी लुगुन को आरोप गठन के स्टेज से मुक्त कर दिया.
आइजी ने रिपोर्ट में सीता स्वांसी के बारे में लिखा है कि उसने पूर्व में निजी स्वार्थ के लिए एक व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए एक लड़की के मनगढ़ंत झूठे ���पहरण के मामले में खुद शिकायतकर्ता बन कर बरियातू थाना में केस दर्ज कराया था . इसलिए संबंधित मामले में भी झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में सीता स्वांसी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कोर्ट में अभियोजन समर्पित किया गया है.

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