रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को किसानों से धान खरीद का पैसा भुगतान नहीं होने काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस एचसी मिश्र की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि धान खरीदने के कई माह बाद भी किसानों को भुगतान नहीं होना चिंता की बात है.
राज्य के सभी जिला के उपायुक्त जवाब दाखिल कर बतायें कि संबंधित जिले में कितने किसानों से कितना धान खरीदा गया आैर उसके बदले कितना भुगतान किया गया है. साथ ही अब तक कितना बकाया है. खंडपीठ ने सरकार को भी यह बताने का निर्देश दिया कि पिछले दिनों केंद्र सरकार की टीम ने भी सूखा का आकलन करने के लिए राज्य में विभिन्न जगहों का दौरा किया था़
कई जिलों के प्रखंडों को सूखाग्रस्त भी घोषित किया गया है. इसके बावजूद किसानों को राहत नहीं मिली. मुआवजा क्यों नहीं मिला है. राहत पहुंचाने की क्या योजना है. शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल किया जाये.
मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने जनवरी माह की तिथि तय करने का निर्देश दिया. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि सूखाग्रस्त घोषित किये जाने के बावजूद किसान को उसका मुआवजा नहीं मिला है.
किसानों से जो धान खरीदी गयी है, उसमें से कुछ जिलों के किसानों को धान का पैसा दे दिया गया है, लेकिन कई जिलों के किसानों को बेचे गये धान का पैसा नहीं मिल पाया है. उल्लेखनीय है कि पूर्व मंत्री हेमंद्र प्रताप देहाती ने जनहित याचिका दायर की है.
