फादर अशोक कुजूर
जापान के ओसाका शहर के निकट किसी गांव में एक जेन मास्टर रहते थे़ उनकी ख्याति पूरे देश में थी़ दूर-दूर से लोग उनसे मिलने व अपनी समस्याओं का समाधान कराने आते थे़ एक दिन मास्टर अपने एक अनुयायी के साथ सुबह की सैर कर रहे थे़ तभी अचानक एक व्यक्ति उनके पास आया और उन्हें भला-बुरा कहने लगा़ पहले उनके लिए कई अपशब्द कहे, पर बावजूद इसके मास्टर मुस्कुराते हुए चलते रहे़
मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा़ इसके बावजूद मास्टर मुस्कुराते हुए बढ़ते रहे़ मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होता देख अंतत: वह व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया़
उस व्यक्ति के जाते ही अनुयायी ने आश्चर्य से पूछा, मास्टर आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया, आप मुस्कुराते भी रहे़ क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्ट नहीं पहुंचा? जेन मास्टर कुछ नहीं बोले और उसे अपने पीछे आने का इशारा किया़ कुछ देर चलने के बाद वे मास्टर के कक्ष तक पहुंच गये. मास्टर बोले, तुम यहीं रुको मैं अंदर से अभी आया़ मास्टर कुछ देर बाद एक मैला कपड़ा लेकर बाहर आये और उसे अनुयायी को थमाते हुए कहा, लो अपने कपड़ा उतार कर इसे धारण कर लो़ कपड़ों से अजीब सी दुर्गंध आ रही थी़ अनुयायी ने उसे हाथ में लेते ही दूर फेंक दिया़ मास्टर बोले, क्या हुआ?
तुम इन मैले कपड़ों को नहीं ग्रहण कर सकते न? ठीक इसी तरह मैं भी उस व्यक्ति द्वारा बोले अपशब्द ग्रहण नहीं कर सकता़ इतना स्मरण रखो कि यदि तुम किसी के अकारण भला-बुरा कहने पर क्रोधित हो जाते हो, तो इसका अर्थ है कि तुम अपने साफ वस्त्रों की जगह उसके फेंके फटे-पुराने मैले कपड़े धारण कर रहे हो़ आगमन काल बुरी आदतों को छोड़ने का समय है़ नशीली चीजों का सेवन छोड़ना अच्छी बात है, किंतु अपने अंदर छिपे गुस्से, ईर्ष्या, बदला, लालच जैसी भावनाओं को छोड़ना और भी अच्छी बात है़ आगमन काल में हम इस तरह की गलत भावनाओं को अपने जीवन से निकाल फेंकने का संकल्प करे़ं
लेखक डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक हैं.
