फादर अशोक कुजूर
एक महात्मा अपने आश्रम में बैठे थे़ उनका एक शिष्य जो कुछ क्रोधी स्वभाव का था, उनके पास आया और बोला- गुरुजी, आप अपना व्यवहार कैसे इतना मधुर बनाये रखते हैं? न आप किसी पर क्रोध करते हैं, न ही किसी को कुछ भला बुरा कहते है़ं
इस अच्छे व्यवहार का रहस्य मुझे भी बतायें. उसकी बात सुनकर महात्मा बोले- मुझे अपने रहस्य के बारे में तो नहीं पता, पर मैं तुम्हारा एक रहस्य जानता हू़ं शिष्य ने आश्चर्य से पूछा, मेरा रहस्य! वह क्या है गुरुजी? संत थोड़ा दुख जताते हुए- तुम अगले एक हफ्ते में मरने वाले हो़ संत की बात सुन शिष्य बहुत उदास हो गया और गुरु का आशीर्वाद लेकर वहां से चला गया़
वहां से जाने के बाद शिष्य का स्वभाव बिल्कुल बदल गया़ वह हर किसी से प्रेम से मिलता और कभी किसी पर क्रोध नहीं करता़ अपना ज्यादातर समय ध्यान व पूजा में लगाता़ वह उन सभी लोगों के पास गया, जिनके साथ उसने कभी गलत व्यवहार किया था.
उसने उन सबसे माफी भी मांगी़ किसी गरीब-दुखी को देखकर उनकी मदद करने से नहीं चूकता़ देखते ही देखते संत की भविष्यवाणी को एक हफ्ता पूरा होने को आया़ वह संत के पास पहुंचा और बोला- गुरु जी, आप की भविष्यवाणी के अनुसार अब मेरा समय पूरा होने वाला है़ मेरी मृत्यु का समय निकट है़ कृपया मुझे आशीर्वाद दे़ं संत ने कहा, अच्छा यह बताओ कि तुम्हारे पिछले सात दिन कैसे बीते? क्या तुम पहले ही की तरह लोगों से नाराज हुए, अभी भी उसी तरह क्रोध आया? शिष्य बोला- नहीं गुरु जी बिल्कुल भी नही़ं मेरे पास जीने के लिए सिर्फ सात दिन थे़
मैं इसे बेकार की बातों में कैसे गंवा सकता था? मैं तो इस दौरान सबसे प्रेम से मिला और जिन लोगों का कभी दिल दुखाया था उन सबसे क्षमा मांगी़ इस क्रिसमस में गैरजरूरी बातों पर ध्यान लगा कर बालक यीशु को भूल जाना किसी मायने में सही नहीं होगा़ याद रहे, यीशु को आपकी आत्मा चाहिए, ताम-झाम नही़ं लेखक डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक हैं.
