रांची : संविधान विशेषज्ञ सह लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ सुभाष कश्यप ने कहा कि वर्तमान में चल रही पत्थलगड़ी को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है. पत्थलगड़ी की परंपरा वर्षों से रही है. जन्म, मृत्यु, स्थान आदि को लेकर पत्थलगड़ी की परंपरा है, लेकिन इसमें कहीं ऐसा नहीं है कि हमारे गांव की सीमा में कोई बाहरी नहीं आयेगा.
ऐसी कोई परंपरा का उल्लेख कहीं नहीं मिलता है. यदि ऐसा होता है, तो संविधान और कानूनों का उल्लंघन माना जायेगा. पत्थलगड़ी ओड़िशा से शुरू होकर झारखंड तक पहुंची. अभी भी पत्थलगड़ी की समस्या का समाधान नहीं हुआ है, बल्कि नियंत्रण हुआ है. उन्होंने कहा कि हम सब भारत के नागरिक हैं. हम सभी को समान अधिकार प्राप्त है. व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता व अखंडता सुरक्षित रखना हमारा सार्वभौम अधिकार है. राष्ट्र की एकता व अखंडता को तोड़ना राष्ट्र विरोधी गतिविधि है. यह संविधान का भी उल्लंघन है. डॉ कश्यप आर्यभट्ट सभागार में भारतीय संविधान में पांचवीं अनुसूची के तहत क्षेत्र व प्रशासन विषय पर बोल रहे थे.
नियम नहीं बनने से लागू नहीं हो पा रहा पेसा कानून
डॉ कश्यप ने कहा कि शिड्यूल एरिया में आदिवासियों के विकास व प्रशासन को लेकर पेसा कानून बनाया गया. लेकिन इसमें इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया है कि कब तक नियम बनाया जाना है. इसकी वजह से देश के अधिकांश राज्यों में पेसा कानून को लागू करने के लिए नियम ही नहीं बनाये गये हैं. इसकी वजह से पेसा कानून लागू नहीं हो पाया. अगर पेसा कानून लागू होता तो अादिवासियों की भाषा, संस्कृति, परंपरा बरकरार रहती. भारत सरकार ने इसको लेकर एक मॉडल रूल तैयार कर राज्यों को भेजा है, लेकिन अब तक इस पर नियम नहीं बनाये गये हैं.
ट्राइबल को मिला है विशेष अधिकार
उन्होंने कहा कि ट्राइबल को देश के सभी नागरिकों की तरह अधिकार प्राप्त है. इसके अलावा शिड्यूल एरिया में इन्हें विशेष अधिकार प्राप्त है, जो संविधान की पांचवीं व छठी अनुसूची में दर्ज है. पांचवीं अनुसूची झारखंड समेत अन्य राज्यों में लागू है. वहीं छठी अनुसूची असम, मेघालय, नागालैंड व मिजोरम में लागू है. अमेरिका, कनाडा व ऑस्ट्रेलिया में ट्राइबल व नन ट्राइबल का विभेद है. पर हमारे देश के अंदर कहीं भी वैसा विभेद नहीं है.
उन्होंने कहा कि आदिवासियों के शोषण के लिए केवल बिजनेसमैन को दोष नहीं दिया जाना चाहिए. आदिवासियों में पैदा हुआ एक नया वर्ष ही आदिवासियों का शोषण कर रहा है. अगर एक ट्राइबल नेता की पत्नी वन विभाग की 700 एकड़ जमीन अपने नाम रजिस्ट्री कराती है, तो इसे क्या कहेंगे? क्या यह शोषण नहीं है?
शिड्यूल एरिया में होना चाहिए लैंड रिफॉर्म
डॉ कश्यप ने एक सवाल के जवाब में कहा कि शिड्यूल एरिया में लैंड रिफॉर्म होना चाहिए. वर्ष 2006 में कानून के तहत पहली बार व्यक्तिगत संपत्ति का अधिकार दिया गया. समय के अनुसार कानून में लैंड रिफॉर्म करना चाहिए. यह करने के लिए संविधान कहीं से रोकता नहीं है. अगर हमें गांधी के सपनों को साकार करना है तो सत्ता का हस्तांतरण आम अादमी के हाथों में करना होगा.
प्राइवेट ऑनरशिप से आदिवासियों की संपत्ति दूसरे के हाथों जाने लगी
डॉ कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों का औपनिवेशिक शासनकाल के दौरान मानना था कि देश के कुछ भाग पिछड़े हैं, उन्हें अलग रखा जाये. ब्रिटिश सरकार ने 1874 में शिड्यूल डिस्ट्रिक्ट एक्ट लागू किया. इसमें वैसे क्षेत्रों का चयन किया गया, जिन्हें अति पिछड़ा माना जाता था. 1935 में भारत शासन अधिनियम लागू किया गया. इसमें राज्यपाल को विशेष अधिकार दिये गये.
अंग्रेजी शासन में जो भी कानून व कमेटियां बनायी गयीं, उससे आदिवासियों की दशा में न तो सुधार हुआ और नहीं विकास. जिस तरह हवा, पानी कुदरत की देन है, वैसे ही जमीन को सामूहिक संपत्ति माना जाता था. पहली बार अंग्रेजों ने प्राइवेट ऑनरशिप लागू किया. इससे आदिवासियों की सामूहिक संपत्ति व जमीन कॉरपोरेट घरानों व नन ट्राइबल को जाने लगी.
सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक शोषण को रोकने के लिए कमेटी ने संविधान सभा को सुझाव दिया. इसके बाद संविधान सभा ने पांचवीं व छठी अनुसूची बनायी. डॉ कश्यप ने कहा कि पांचवीं व छठी अनुसूची संविधान सभा का इजाद नहीं था, बल्कि पूर्व में 1935 के कानून में इसका प्रावधान था. वहीं से इसे लिया गया.
रांची देश की राजधानियों में सबसे सुंदरतम नगरी
संविधान विशेषज्ञ डॉ कश्यप ने कहा कि 15 नवंबर को झारखंड अपनी स्थापना के 18 वर्ष पूरा करेगा. झारखंड देश के सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक है. यहां की प्रकृति मनमोहक है. रांची देश की राजधानियों में सबसे सुंदरतम नगरी है. इससे पहले कल्याण सचिव हिमानी पांडेय ने डॉ कश्यप के व्यक्तित्व के बारे में प्रकाश डाला.
जवाब नहीं मिलने पर जतायी आपत्ति, किया हंगामा
डॉ कश्यप के द्वारा लोगों के सवालों का जवाब दिये जाने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाकर कुजूर अपने स्थान पर खड़े हो गये. उन्होंने जोर-जोर से अपनी बातें रखनी शुरू कर दी. कहा कि उनके सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है. यहां जब पेसा कानून लागू है तो नगर निगम व पंचायत का संचालन कैसे हो रहा है? क्यों नहीं पेसा कानून पूरी तरह लागू हुआ? मेरा पास इतने सारे कागजात हैं.
इसे क्यों नहीं देखा जा रहा है? अगर कोई अपने अधिकार के लिए लड़ता है तो क्या यह देशद्रोह है? इस प्रकार का आयोजन कर सरकार आइवाश कर रही है. कोई काम नहीं हुआ है. आदिवासियों काे अधिकार नहीं दिये जा रहे हैं. आयोजक ने कहा कि अाप अपनी बात रख चुके हैं. अगर कोई सवाल है तो उसे आप सौंप दे. उसे देख लिया जायेगा. इस पर प्रभाकर कुजूर नहीं माने. खड़ा होकर अपनी बातें कहते रहे. इस वजह से कार्यक्रम को पहले समाप्त कर देना पड़ा.
संविधान की पांचवीं अनुसूची विषयक सेमिनार में जो सवाल पूछे गये
रांची. आर्यभट्ट सभागार में आयोजित संविधान की पांचवीं अनुसूची विषयक सेमिनार में संविधान विशेषज्ञ डॉ सुभाष कश्यप से कई सवाल पूछे गये, जिसका उन्होंने जवाब दिया. जो सवाल पूछे गये, वह इस प्रकार है.
पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में पंचायती राज विस्तार अधिनियम लाकर पेसा कानून बनाया गया. क्या नगर निगम व नगरपालिका की शक्तियों का विस्तार पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में किया गया है? यदि किया गया है, तो कब संविधान संशोधन किया गया? यदि नहीं, तो क्या पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में नगर निगम और नगरपालिका संवैधानिक है या नहीं? -क्या कहता है अनुच्छेद 243 जेड (सी)?
ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) के अध्यक्ष गैर आदिवासी हो सकते हैं या नहीं? यदि हो सकते हैं, तो किन कानूनी प्रावधानों के तहत?
संविधान में कितने पार्ट हैं और कितने शिड्यूल हैं? पार्ट व शिड्यूल में क्या अंतर है?
पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में निजी कंपनियों द्वारा जमीन का अधिग्रहण कर खनन कार्य किया जा रहा है, यह गलत है या सही?
सीएनटी एक्ट में जब संशोधन हो रहा था, तब जमीन बचाने के लिए मुंडा समुदाय ने पत्थलगड़ी आंदोलन शुरू किया, जिसमें पत्थरों पर संविधान की बातें लिखी गयीं. यह किस तरह असंवैधानिक है, कृपया बतायें.
पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में सेक्शन-40 के तहत जिला स्तर पर स्वशासी जिला परिषद का प्रावधान छठी अनुसूची के पैटर्न के तहत किया जाना था, लेकिन नहीं हो पाया. यह गलत है या सही?D
