रांची : भारतीय ट्राइबल पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, गुजरात से आये शैलेश कुमार वालेकर ने कहा कि आदिवासियों को साधन, संपत्ति व शासन में बराबरी का हिस्सा मिलना चाहिए़ देश में लगभग 12 करोड़ आदिवासी हैं, जिन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है. श्री वालेकर ने कहा कि पार्टी की स्थापना 2016 में हुई और 2017 के विधानसभा चुनाव में दो सीटें मिली़.
इसके साथ ही पार्टी ने दो जिला पंचायत व पांच तालुका पंचायतों में भी जीत दर्ज की है़ झारखंड के नौजवानों को भी उनके राज्य में अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे पलायन के लिए मजबूर न हो़ं वे आदिवासी जन परिषद के विशेष महाधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे़ यह आयोजन शुक्रवार को करमटोली स्थित सेलिब्रेशंस हॉल में हुआ़.
कुदरत के कानून के अनुसार चलते हैं आदिवासी : राष्ट्रीय आदिवासी धर्म समन्वय समिति के गुजरात प्रदेश संयोजक लालू भाई वसावा ने कहा कि आदिवासियों को आदिवासी धर्म कॉलम की मांग करनी चाहिए़ धर्म कोड की मांग करेंगे, तो सरकार को अपनी संहिता बना कर देनी होगी, आदिवासी नॉन ज्यूडिशियल लोग हैं और कुदरत के कानून के अनुसार चलते है़ं
धर्मांतरण करने वाले आदिवासी अपनी रूढ़ि व प्रथाओं से दूर हाेते हैं और इससे हमारे धार्मिक अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न होता है़ इससे हमारी राष्ट्रीय शक्ति उभर नहीं पाती़ ऑल इंडिया एससी/ एसटी/ ओबीसी फोरम के महासचिव डॉ सहदेव राम ने कहा कि भ्रष्टाचार, असंतोष, महंगाई, धार्मिक तनाव, मानवाधिकार के उल्लंघन के मामले चरम पर है़ं संविधान की धज्जियां उड़ायी जा रही है़ं पर, यह झारखंड का इतिहास रहा है कि जब-जब अन्याय बढ़ा है, यहां के आदिवासियों व मूलवासियों ने मिल कर उलगुलान किया है़ कार्यक्रम को पूर्व एमएलसी छत्रपति शाही मुंडा, मानवशास्त्री डॉ करमा उरांव, जन परिषद के अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा, लोक गायक मधु मंसूरी, सोमा मुंडा, बालमुकुंद लोहरा व अन्य ने भी संबोधित किया़
टीएसपी का पैसा डाइवर्ट या लैप्स न हो, इसके लिए कानून बने
विशेष महाधिवेशन के दौरान सरकार से मांग की गयी कि ट्राइबल सब प्लान का पैसा डाइवर्ट या लैप्स न हो, इसके लिए कानून बने़ इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण कानून अविलंब रद्द किया जाये, आदिवासियों की धार्मिक व सामाजिक पहचान के लिए धर्म कोड लागू हो, संविधान की छठी अनुसूची लागू की जाये, पारंपरिक व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए आर्थिक पैकेज दिया जाये, मुंडारी खूंटकट्टी व्यवस्था का संचालन कानून के अनुसार ही किया जाये और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू हो़
यह भी मांग की गयी कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को आठवीं अनुसूची के तहत लाया जाये, गैर कानूनी रूप से हड़पी गयी आदिवासी जमीन वापस करायी जाये, लोहर जनजाति की खतियानी लोहार जमीन की हुई अवैध खरीद- बिक्री की जांच के लिए एसआइटी का गठन हो, लोहरा जनजाति, भूमिहर मुंडा, बड़ाइक व चीक बड़ाइक से जुड़ी खतियायनी त्रुटि में संशोधन किया जाये, समता जजमेंट लागू हो, तमाड़ प्रखंड का परासी सोना खनन पट्टा लीज रद्द किया जाये, सीएनटी व एसपीटी एक्ट की धारा 71- क की काल अवधि समाप्त की जाये और राज्य में संपूर्ण शराबबंदी लागू हो़
