झारखंड में प्रयोग के तौर पर खेतों में होगा सेंसर का उपयोग

रांची : झारखंड में भी प्रयोग के तौर पर खेतों में सेंसर का उपयोग किया जायेगा. इसके लिए कृषि विभाग को प्रस्ताव भेजा जायेगा. इसकी शुरुआत केवीके या कृषि विभाग के फार्म से हो सकती है. इजराइल की खेतों में सेंसर का खूब प्रयोग हो रहा है. यह एसएमएस के जरिये बताता है कि मिट्टी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : झारखंड में भी प्रयोग के तौर पर खेतों में सेंसर का उपयोग किया जायेगा. इसके लिए कृषि विभाग को प्रस्ताव भेजा जायेगा. इसकी शुरुआत केवीके या कृषि विभाग के फार्म से हो सकती है. इजराइल की खेतों में सेंसर का खूब प्रयोग हो रहा है. यह एसएमएस के जरिये बताता है कि मिट्टी को कब पानी की जरूरत है, कब खाद की जरूरत है, मिट्टी का स्वरूप क्या है.
पानी और खाद भी जरूरत के हिसाब से स्वचालित मशीन से खेतों को मिल जाता है. ऐसा कहना है इजराइल जानेवाली 32 सदस्यीय टीम का नेतृत्व करनेवाले कृषि निदेशक रमेश घोलप का. अपने कार्यालय में मंगलवार को प्रेस से बात करते हुए श्री घोलप ने कहा कि इजराइल में 500 से 600 मिमी बारिश होती है, जबकि झारखंड में करीब 1200 मिमी होती है. वहां पानी के बेहतर प्रयोग से ही खेती का विकास हो रहा है. खेतों में पाइप लाइन से पानी दी जा रही है.
एक पाइप लाइन से समुद्र के खारा पानी को ठीक कर तथा दूसरे पाइप लाइन से सीवरेज का ट्रीट किया हुआ पानी भेजा जाता है. किसानों को यह भी जानकारी दी गयी है कि किस खेत में कब और कैसे पानी का उपयोग करना है. इस तरह का प्रयोग झारखंड में भी किया जा सकता है.
पशुधन का नस्ल सुधारना जरूरी : श्री घोलप ने बताया कि विश्व में सबसे अधिक मवेशी भारत में हैं. लेकिन दूध उत्पादन के हिसाब से हम टॉप 15 देशों में भी नहीं हैं. इजराइल कम आबादी और कम जानवर होने के बाद भी काफी मात्रा में दूध का उत्पादन करता है. वहां दूध उत्पादन के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम चलाया गया है. भारत में भी नस्ल सुधार से ही दूध का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. क्योंकि आनेवाले दिनों में बहुत अधिक जानवरों को खाना उपलब्ध कराना भी चुनौती होगी.
श्री घोलप ने कहा कि इजराइल में किसानों के समूह से खेती ज्यादा होती है. इसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था बेहतर होती है. यहां भी किसानों के समूह को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग मशीन देने की अनुशंसा राज्य सरकार से की जायेगी. इससे सब्जियों की अच्छी ग्रेडिंग और पैकेजिंग हो सकेगी. इस मौके पर टीम के सदस्य उद्यान निदेशक विजय कुमार और संयुक्त कृषि निदेशक सुभाष सिंह भी मौजूद थे.
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