डाटा प्रोटेक्शन लॉ विषय पर कार्यशाला, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने कहा
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने कहा है कि अधिवक्ताओं को संवैधानिक कानून के नये प्रावधानों के प्रति जागरूक रहना चाहिए.
इससे खुद को हमेशा अप-टू-डेट रखना चाहिए, ताकि वकालत के दाैरान उक्त प्रावधानों का उपयोग कर वे अपने मुव्वकिल को न्याय दिला सकें. जस्टिस सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के निजता का अधिकार (राइट टू प्रिवेसी) पर दिये गये फैसले को सरल व सटीक बताया.
उन्होंने कहा कि राइट टू प्रिवेसी का फैसला भारतीय संविधान के इतिहास का महत्वपूर्ण फैसला है, जिसका प्रभाव आनेवाले दिनों में देखने को मिलेगा. जस्टिस सिंह शनिवार को होटल ली लैक के सभागार में आयोजित आइपीआर ओवरव्यू एंड डाटा प्रोटेक्शन लॉ विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. उक्त कार्यशाला का आयोजन दिल्ली के स्वयंसेवी संगठन आत्मबोध व अधोपंत लीगल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था.
हाइकोर्ट के जस्टिस अनंत बिजय सिंह ने डाटा व डाटा प्रोटेक्शन के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में डाटा महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में उभरा है. डाटा प्रोटेक्शन या डाटा प्राइवेसी को अलग-अलग कानूनों के तहत प्रोटेक्ट किया जाता है.
उन्होंने व्यावसायिक डाटा के प्रोटेक्शन के वर्तमान प्रावधानों पर विचार रखा. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ मौर्या विजय चंद्रा ने कार्यशाला का संचालन किया. दिल्ली हाइकोर्ट की अधिवक्ता मीनू चंद्रा ने बताया कि डाटा प्रोटेक्शन के लिए बिल प्रस्तावित है. इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी गयी. मौके पर झारखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता सचिन कुमार, अधिवक्ता रूपेश कुमार, अधिवक्ता धीरज कुमार सहित कई अधिवक्ता उपस्थित थे.
