फर्जी नक्सली सरेंडर मामला : झारखंड हाइकोर्ट ने कहा, ओरिजनल डॉक्यूमेंट के साथ गृह सचिव हाजिर हों

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को 514 फर्जी नक्सलियों के सरेंडर मामले की सीबीआइ से जांच कराने काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष प्रकट किया. नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने गृहसचिव को […]

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को 514 फर्जी नक्सलियों के सरेंडर मामले की सीबीआइ से जांच कराने काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष प्रकट किया.
नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने गृहसचिव को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया. कहा कि अोरिजनल डॉक्यूमेंट के साथ 28 अगस्त को दिन के तीन बजे चेंबर में उपस्थित रहें. उस वक्त किसी भी पक्ष के अधिवक्ता उपस्थित नहीं रहेंगे. जो भी पूछताछ करनी होगी, कोर्ट स्वयं पूछताछ करेगा.
यदि वरीय पुलिस अॉफिसर से पूछताछ की जरूरत पड़ेगी, तो कोर्ट उन्हें बुला लेगा. खंडपीठ ने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है.
उक्त निर्देश देने के पूर्व खंडपीठ ने राज्य सरकार की अोर से दायर सीलबंद रिपोर्ट को देखा. फिर केंद्र सरकार की सीलबंद रिपोर्ट का अध्ययन किया. इससे पूर्व राज्य सरकार के विशेष वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने खंडपीठ से आग्रह किया कि गृह सचिव के साथ वरीय पुलिस पदाधिकारी को भी साथ में रहने की अनुमति दी जाये.
प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने इसका विरोध किया. कहा कि पुलिस अधिकारी के रहने से गृह सचिव स्वतंत्र रूप से जानकारी नहीं दे पायेंगे. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट की अोर से जनहित याचिका दायर की गयी है. प्रार्थी ने मामले की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की है.

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