रांची : सांसद रामटहल चौधरी ने सदन में पिछड़े वर्गों के लिए लाये गये राष्ट्रीय ओबीसी बिल के समर्थन में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आयोग बनने के बाद अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग की तरह ही ओबीसी आयोग को संवैधानिक अधिकार मिलेगा.
कहा कि जब झारखंड बिहार का हिस्सा था, तब ओबीसी का आरक्षण 27 प्रतिशत था. झारखंड बनने के बाद इसे घटा कर 14 प्रतिशत कर दिया गया. झारखंड में अधिकारी पिछड़े वर्ग के सर्टिफिकेट का नवीकरण प्रत्येक वर्ष करते हैं. इन्हें इतनी भी समझ नहीं है कि जाति नहीं बदलती है.
जेपीएससी बीडीओ, सीओ आदि की परीक्षा में कट ऑफ मार्क्स अधिक रखा जाता है, ताकि इसमें ओबीसी शामिल नहीं हो सकें. छोटानागपुर की कुड़मी, कुर्मी जाति 1950 तक आदिवासी में शामिल थी. इसके बाद षड्यंत्र के तहत इन्हें एसटी सूची से बाहर कर दिया गया.
