मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, अविलंब भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश
सुनील चौधरी
रांची : अमृतसर-दिल्ली-हावड़ा फ्रेट कॉरीडोर के निर्माण का मामला झारखंड में जमीन के कारण लंबित है. उल्लेखनीय है कि यह कॉरीडोर झारखंड के धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग और कोडरमा से गुजरेगा. इसके लिए इन चारों जिलों में 1105.55 एकड़ जमीन की जरूरत है.
जिसमें 756.86 एकड़ वन भूमि भी है. 111.31 एकड़ सरकारी भूमि और 234.47 एकड़ निजी भूमि है. कई जगहों पर पोजेशन नहीं मिलने की वजह से फ्रेट कॉरीडोर का काम आरंभ नहीं हो सका है. बताया गया कि अब अगले चरण में झारखंड में ही काम आरंभ होना है. इसके लिए भूमि अधिग्रहण की जरूरत बतायी जा रही है. गुरुवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इसकी समीक्षा कर अविलंब भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
वर्ष 2005 में हुई थी घोषणा
वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर की घोषणा की थी, जो पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और प बंगाल में बनना है. झारखंड में यह कॉरोडोर 196 किमी का होगा. कुल 1856 किमी का यह कॉरीडोर है. इस कॉरीडोर का निर्माण कोयला, लोहा, सीमेंट, फर्टिलाइजर, लाइमस्टोन, नमक आदि समेत अन्य खनिजों के परिवहन के लिए बनवाया जा रहा है, ताकि समय पर इनकी डिलेवरी हो सके. लगभग 80 करोड़ की लागत से इस कॉरीडोर का निर्माण हो रहा है. इसके निर्माण के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर कॉरपोरेशन अॉफ इंडिया लिमिटेड नाम के एसपीवी का भी गठन किया गया है, जो रेल मंत्रालय की कंपनी है.
वन भूमि के कारण हो रही है समस्या
इस कॉरीडोर में सबसे अधिक वन भूमि के क्लीयरेंस को लेकर समस्या है, जिसमें सरकार से सहायता मांगी गयी है. धनबाद में स्टेज वन क्लीयरेंस मिल गया है. स्टेज टू के लिए 27.4.18 को डीएफओ के पास प्रस्ताव भेजा गया है. गिरिडीह में भी स्टेज टू के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. कोडरमा के लिए भी स्टेज वन क्लीयरेंस का प्रस्ताव 19.4.18 को भेजा गया है. हजारीबाग के लिए प्रस्ताव डीएफओ के पास है.
कितनी जमीन चाहिए
जिला एकड़ में वनभूमि
धनबाद 234.21 4.42
कोडरमा 288.96 221.53
गिरिडीह 60.12 26.77
हजारीबाग 522.36 504.14
