:::गोला प्रखंड के 127 सरकारी विद्यालयों में लगभग 14 हजार विद्यार्थी पहली से सातवीं तक की दे रहे हैं वार्षिक परीक्षा :::फोटो कॉपी करा कर ली जा रही है परीक्षा, विद्यार्थियों को हो रही परेशानी गोला. गोला प्रखंड के सरकारी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में कक्षा पहली से सातवीं तक की वार्षिक परीक्षा 11 मार्च से शुरू हो गयी है, लेकिन परीक्षा में प्रश्न पत्रों की कमी ने शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है. पर्याप्त संख्या में प्रश्न पत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण शिक्षक प्रश्न पत्रों की फोटो कॉपी करा कर परीक्षा संपन्न करा रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, गोला प्रखंड के 127 सरकारी विद्यालयों में लगभग 14 हजार छात्र-छात्राएं कक्षा पहली से सातवीं तक की वार्षिक परीक्षा दे रहे हैं. यह परीक्षा 11 मार्च से शुरू होकर 12 और 14 मार्च तक चलेगी. परीक्षा में प्रश्न पत्रों की कमी आने से परीक्षा संचालन में असमंजस की स्थिति है. शिक्षकों का कहना है कि प्रश्न पत्रों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण परीक्षा संचालन में कठिनाई हो रही है. कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या के मुकाबले कम प्रश्न पत्र मिलने की सूचना है. इससे यहां के शिक्षकों ने प्रश्न प्रत्रों की वैकल्पिक व्यवस्था करायी. किसान उच्च विद्यालय, डभातू में वर्ग छठे एवं सातवें वर्ग की परीक्षा चल रही है. यहां 70 छात्र परीक्षा दे रहे हैं. गुरुवार को हिंदी एवं विज्ञान विषय की परीक्षा में भी प्रश्न पत्रों की फोटो कॉपी करानी पड़ी. 11 मार्च को उत्क्रमित मध्य विद्यालय, रौरौ में वर्ग सातवीं में 16 छात्र अंग्रेजी परीक्षा में शामिल हुए. परीक्षा के ठीक पहले यहां के एक शिक्षक को पीडीएफ के माध्यम से एक प्रश्न पत्र मिला. इसकी फोटो कॉपी करा कर परीक्षा दिलायी गयी. इसी प्रकार, सातवीं वर्ग में अंग्रेजी में उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बरलंगा में 65 एवं उत्क्रमित उच्च विद्यालय, ऊपरबरगा में 83 छात्र शामिल हुए. यहां भी प्रश्न पत्र की फोटो कॉपी करा कर परीक्षा दिलायी गयी. प्रश्न पत्रों की मांग भेजी गयी थी, पर अपेक्षित संख्या में नहीं कराया गया उपलब्ध : बीइइओ प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुलोचना कुमारी ने बताया कि विभाग की ओर से छात्रों की संख्या के आधार पर प्रश्न पत्रों की मांग जिला में भेजी गयी थी, लेकिन राज्य स्तर पर अपेक्षित संख्या में प्रश्न पत्र उपलब्ध नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्रों की आपूर्ति राज्य स्तर पर होती है. जहां भी कमी है, वहां इसकी भरपाई करने का प्रयास किया जा रहा है.
विद्यालयों में प्रश्न पत्रों की कमी से शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, किसान उवि को नहीं मिला एक भी प्रश्न पत्र
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