पतरातू से अजय तिवारी की रिपोर्ट
Patratu Dam: प्राकृतिक सुंदरता और क्षेत्र की जल जीवनरेखा माने जाने वाला रामगढ़ जिले का पतरातू डैम इन दिनों बढ़ते प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. तीन ओर पहाड़ियों से घिरे इस डैम का निर्माण बांध बनाकर किया गया था, जिसमें बरसात के मौसम में आसपास की पहाड़ियों से आने वाले पानी को संग्रहित कर वर्षभर उपयोग में लाया जाता है. यही पानी क्षेत्र के पावर प्लांट, सीसीएल और पीटीपीएस कॉलोनी समेत आसपास के इलाकों में जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत है. ऐसे महत्वपूर्ण जलस्रोत का प्रदूषित होना अब चिंता का विषय बनता जा रहा है.
मछली पालन के केज से बढ़ रहा जल प्रदूषण
डैम के अंदर बड़े स्तर पर लगाए गए मछली पालन के केज अब प्रदूषण का कारण बन रहे हैं. इन केजों में मछलियों को दिया जाने वाला बचा हुआ चारा और उनका मल-मूत्र सीधे पानी में मिल जाता है, जिससे पानी गंदा हो रहा है. इससे डैम का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ रहा है.
रिसोर्ट, होटल और घरों का गंदा पानी भी जिम्मेदार
डैम के किनारे तेजी से बन रहे रिसोर्ट, होटल और घरों से निकलने वाला गंदा पानी बिना साफ किए सीधे डैम में जा रहा है. इससे पानी और ज्यादा गंदा हो रहा है और आगे चलकर इसके इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है.
पावर प्लांट और कॉलोनियों की जलापूर्ति पर असर की आशंका
पतरातू डैम का पानी इलाके के कारखानों और घरों के लिए बहुत जरूरी है. इसी से पावर प्लांट, सीसीएल और पीटीपीएस कॉलोनी में पानी जाता है. अगर समय पर प्रदूषण नहीं रोका गया, तो पानी की सप्लाई और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ सकता है.
पर्यटन और पर्यावरण दोनों पर खतरा
यह डैम क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है, जहां हर दिन काफी लोग आते हैं. बढ़ता प्रदूषण इसकी खूबसूरती को खराब कर रहा है और जिससे घूमने-फिरने पर भी असर पड़ सकता है.
स्थानीय लोगों ने उठाई ठोस कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मछली पालन के केजों की सही जांच हो और उन पर नियंत्रण रखा जाए. साथ ही रिसोर्ट, होटल और घरों के गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूरी की जाए और डैम को बचाने के लिए लंबी योजना बनाई जाए. लोगों का कहना है कि अगर समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो इस जरूरी जलस्रोत की हालत और खराब हो सकती है.
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